तकनीकी निगरानी से सुधरेगी राष्ट्रीय राजमार्गों की निर्माण गुणवत्ता

नई दिल्ली -तकनीकी प्रणालियों का प्रभावी उपयोग राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण के विभिन्न चरणों में निर्धारित मानकों के पालन का आकलन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। हालांकि, केवल तकनीक के भरोसे निर्माण की गुणवत्ता सुनिश्चित नहीं की जा सकती। इसके लिए नियमित निरीक्षण, प्रशिक्षित कर्मचारियों की तैनाती और खामियां सामने आने पर समय पर सुधारात्मक कार्रवाई करना भी जरूरी होगा।
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) और संबंधित एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि तकनीकी निगरानी को केवल औपचारिक प्रक्रिया तक सीमित न रखा जाए, बल्कि इसके माध्यम से निर्माण कार्यों में वास्तविक सुधार सुनिश्चित किया जाए।
अंतिम मंजूरी के बाद स्पष्ट होगी जिम्मेदारियों की व्यवस्था
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की ओर से मॉडल कंसेशन एग्रीमेंट में संशोधन की प्रक्रिया जारी है। अंतिम स्वीकृति मिलने के बाद नए प्रावधान जारी किए जाएंगे। इसके बाद ही ठेकेदार कंपनियों, निगरानी एजेंसियों और संबंधित प्राधिकरणों की जिम्मेदारियों में किए जाने वाले बदलावों की विस्तृत जानकारी सामने आएगी।
इस पहल का मुख्य उद्देश्य निर्माण कार्यों में खामियां सामने आने के बाद कार्रवाई करने के बजाय उन्हें समय रहते रोकना है। इसके लिए ठेकेदारों की निर्माण संबंधी जिम्मेदारियों, निगरानी एजेंसियों के निरीक्षण संबंधी दायित्वों और एनएचएआई की अनुबंध के तहत निगरानी की भूमिका के बीच स्पष्ट अंतर निर्धारित करना आवश्यक होगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, तकनीकी निगरानी, नियमित निरीक्षण और जवाबदेही की प्रभावी व्यवस्था से राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की गुणवत्ता में सुधार किया जा सकता है। साथ ही, निर्माण संबंधी खामियों को समय रहते दूर करने से सड़क दुर्घटनाओं के जोखिम को कम करने और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में भी मदद मिल सकती है।











