चीनी की कीमतें नियंत्रित करने के लिए सरकार का बड़ा कदम, गन्ने से बनने वाले एथेनॉल की खरीद पर रोक
कमजोर मानसून से गन्ना उत्पादन प्रभावित होने के बाद फैसला, 1 नवंबर से लागू होगी नई व्यवस्था; तेल कंपनियां अब वैकल्पिक कच्चे माल से बने एथेनॉल की करेंगी खरीद

नई दिल्ली। चीनी की कीमतों को नियंत्रित रखने और घरेलू बाजार में इसकी उपलब्धता बनाए रखने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने गन्ने और चीनी से तैयार एथेनॉल की खरीद पर रोक लगाने का फैसला किया है। यह व्यवस्था 1 नवंबर से शुरू होने वाले नए एथेनॉल आपूर्ति वर्ष में लागू होगी। बताया गया है कि कमजोर मानसून के कारण गन्ने के उत्पादन पर असर पड़ने के बाद सरकार ने यह कदम उठाया है।
सरकार के निर्देशों के आधार पर सरकारी तेल कंपनियों ने नए आपूर्ति वर्ष के लिए एथेनॉल खरीद का संयुक्त टेंडर जारी किया है। इसमें करीब 1,100 करोड़ लीटर एथेनॉल की खरीद प्रस्तावित है। टेंडर दस्तावेज के अनुसार, गन्ने के रस, चीनी, चीनी के सिरप और बी-हेवी शीरे से तैयार एथेनॉल की आपूर्ति के लिए प्रस्ताव नहीं मांगे गए हैं।
इस फैसले के पीछे चीनी उत्पादन में संभावित कमी को प्रमुख कारण माना जा रहा है। भारत दुनिया के प्रमुख चीनी उत्पादक देशों में शामिल है। इस वर्ष कमजोर मानसून और मौसम संबंधी परिस्थितियों के कारण गन्ने की फसल प्रभावित होने की खबरें हैं। ऐसे में सरकार चीनी की उपलब्धता बनाए रखने और कीमतों पर दबाव कम करने के लिए कदम उठा रही है।
वैकल्पिक कच्चे माल से बने एथेनॉल को मिलेगी जगह
नए टेंडर में एथेनॉल आपूर्तिकर्ता सी-हेवी शीरे, खराब हो चुके खाद्यान्न, भारतीय खाद्य निगम से खरीदे गए अतिरिक्त चावल, मक्का और राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति के तहत अनुमत अन्य कच्चे माल से तैयार एथेनॉल की पेशकश कर सकेंगे। इससे पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण के लिए आवश्यक ईंधन की आपूर्ति जारी रखने का प्रयास किया जाएगा, जबकि गन्ने और चीनी पर निर्भरता घटेगी।
भारत आयातित पेट्रोलियम पर निर्भरता कम करने के लिए पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण को बढ़ावा दे रहा है। ऐसे में कच्चे माल के स्रोतों में बदलाव से एथेनॉल आपूर्ति और चीनी उद्योग के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश की जा रही है।
चीनी मिलों को अतिरिक्त बिक्री की अनुमति
सरकार ने चीनी मिलों को अक्टूबर 2026 में उत्पादित चीनी को अक्टूबर और नवंबर के दौरान नियमित मासिक रिलीज कोटे के अतिरिक्त बेचने की अनुमति भी दी है। उदाहरण के तौर पर, यदि कोई मिल अक्टूबर में 1,000 मीट्रिक टन चीनी का उत्पादन करती है, तो वह निर्धारित शर्तों के अनुसार इस मात्रा को अक्टूबर और नवंबर में बेच सकेगी। यह बिक्री सामान्य मासिक कोटे के अतिरिक्त होगी।
सरकार के इन कदमों का उद्देश्य चीनी की उपलब्धता बढ़ाना, कीमतों को नियंत्रित रखना और एथेनॉल उत्पादन के लिए वैकल्पिक कच्चे माल के उपयोग को प्रोत्साहित करना है।













