झखरावल की सरकारी जमीन पर कार्रवाई का इंतजार, तहसीलदार के आदेश के पालन पर उठे सवाल
देवसर में कथित अतिक्रमण को लेकर शिकायत, बैजनाथ मिश्र की भूमिका और एसडीएम कार्यालय में उनकी पहुंच की जांच कराने की मांग

देवसर/सिंगरौली। शासकीय भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए न्यायालयीन आदेश जारी होने के बावजूद कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट नहीं होने पर देवसर तहसील में राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। ग्राम झखरावल की सरकारी जमीन से जुड़े मामले में शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि तहसीलदार न्यायालय के बेदखली आदेश के बाद भी अतिक्रमण नहीं हटाया गया। शिकायत में बैजनाथ मिश्र पर जमीनों पर कथित कब्जे के आरोप लगाने के साथ एसडीएम कार्यालय में उनकी भूमिका की जांच की मांग भी की गई है।
26 मार्च के आदेश पर अमल की स्थिति क्या है?
उपलब्ध न्यायालयीन दस्तावेज के अनुसार, ग्राम झखरावल में खसरा नंबर 46 की कुल 0.3300 हेक्टेयर शासकीय भूमि में से 0.0070 हेक्टेयर भूमि पर कथित अतिक्रमण के मामले में मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता, 1959 की धारा 248 के तहत कार्रवाई की गई थी। तहसीलदार न्यायालय देवसर के 26 मार्च 2026 के आदेश में 1,000 रुपये का अर्थदंड लगाने और संबंधित भूमि से बेदखली की कार्रवाई के निर्देश दर्ज होने की जानकारी दी गई है।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि आदेश के बावजूद जमीन से अतिक्रमण नहीं हटाया गया। ऐसे में राजस्व विभाग से यह स्पष्ट किए जाने की मांग उठ रही है कि आदेश के पालन में अब तक क्या कार्रवाई हुई है और यदि कार्रवाई लंबित है, तो इसके पीछे क्या कारण हैं। आदेश के वर्तमान क्रियान्वयन की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
10 एकड़ जमीन को लेकर भी शिकायत
शिकायत में बैजनाथ मिश्र पर करीब 5 एकड़ आदिवासी भूमि और 5 एकड़ शासकीय भूमि पर कथित कब्जे के आरोप लगाए गए हैं। इन आरोपों की वास्तविकता जानने के लिए संबंधित भूमि के राजस्व रिकॉर्ड, स्वामित्व, सीमांकन और मौके की स्थिति की जांच जरूरी है। उपलब्ध जानकारी से इन जमीनों पर कथित कब्जे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं होती।
एसडीएम कार्यालय में काम करने की अनुमति किसने दी?
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि बैजनाथ मिश्र एसडीएम कार्यालय में कंप्यूटर पर बैठकर काम करते हैं, जबकि कार्यालय में उनकी आधिकारिक पदस्थापना की स्थिति स्पष्ट नहीं है। शिकायत में यह भी सवाल उठाया गया है कि यदि उन्हें कार्यालय में काम करने के लिए अधिकृत किया गया है, तो इसका आधार क्या है और सरकारी दस्तावेजों अथवा फाइलों तक उनकी पहुंच किस सीमा तक है।
इसके अलावा शिकायतकर्ता ने एसडीएम से कथित करीबी और एसडीएम की गाड़ी चलाने वाले उनके बेटे का हवाला देकर प्रभाव जताने का आरोप भी लगाया है। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित कार्यालय के रिकॉर्ड और प्रशासनिक जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।
प्रशासन से जांच और कार्रवाई की मांग
शिकायतकर्ता ने जिला प्रशासन से तहसीलदार न्यायालय के आदेश के पालन की स्थिति सार्वजनिक करने, संबंधित शासकीय एवं आदिवासी भूमि का रिकॉर्ड जांचने और कथित अतिक्रमण का सीमांकन कराने की मांग की है। साथ ही एसडीएम कार्यालय में बैजनाथ मिश्र की भूमिका, वहां काम करने की अनुमति और कार्यालयीन दस्तावेजों तक उनकी पहुंच की भी जांच कराने की मांग उठाई गई है।
अब मामले में प्रशासन की कार्रवाई पर नजर रहेगी। संबंधित अधिकारियों और बैजनाथ मिश्र का पक्ष सामने आने से आरोपों की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल जमीन पर कब्जे और कार्यालयीन पहुंच से जुड़े आरोपों को जांच से पहले प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता।













