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सत्य पाल जैन ने छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर ‘केतावा’ (Ketawa) की सर्वे रिपोर्ट जारी की

 

मनोज शर्मा,चंडीगढ़, 21 अक्टूबर, 2026। ‘केतावा – सेंटर फॉर बिहेवियर चेंज’, चंडीगढ़ द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट “बियॉन्ड अवेयरनेस: व्हाट यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स नो, फील एंड डू अबाउट मेंटल हेल्थ” (जागरूकता से परे: विश्वविद्यालय के छात्र मानसिक स्वास्थ्य के बारे में क्या जानते हैं, क्या महसूस करते हैं और क्या करते हैं) को आज भारत के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल, वरिष्ठ अधिवक्ता, पूर्व सांसद और भारतीय विधि आयोग के पूर्व सदस्य सत्य पाल जैन ने जारी किया।

इस अवसर पर अधिवक्ता और पूर्व मेयर देवेश मौदगिल (जो वर्तमान में चंडीगढ़ प्रशासन की सलाहकार परिषद के सदस्य हैं), पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ के ‘पॉपुलेशन रिसर्च सेंटर’ की निदेशक प्रो. कुमूल अब्बी, ‘सेंटर फॉर सोशल वर्क’ के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. गौरव गौर, और पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ के ‘पॉपुलेशन रिसर्च सेंटर’ के वरिष्ठ अनुसंधान विश्लेषक डॉ. सुखबीर सिंह भी उपस्थित थे।

यह रिपोर्ट मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता और मदद मांगने के बीच के अंतर को उजागर करती है। इसमें शैक्षणिक संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य के लिए अधिक मजबूत और आसानी से उपलब्ध सहायता प्रणालियों की आवश्यकता पर जोर दिया गया है। सर्वे में पाया गया कि 93.5% छात्र मानसिक स्वास्थ्य को शारीरिक स्वास्थ्य जितना ही महत्वपूर्ण मानते हैं, लेकिन केवल 15.9% छात्रों ने ही किसी मानसिक स्वास्थ्य पेशेवर से परामर्श लिया है। इसके अलावा, 43.1% छात्रों ने बताया कि उन्हें यह नहीं पता कि मदद के लिए कहाँ जाना चाहिए, जबकि 31% ने सामाजिक कलंक (stigma) या लोगों द्वारा जज किए जाने के डर का हवाला दिया। केवल 36.2% छात्रों को ही अपने आस-पास उपलब्ध मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं के बारे में जानकारी थी।

रिपोर्ट जारी करते हुए सत्य पाल जैन ने कहा, “छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर परिवारों, शैक्षणिक संस्थानों और पूरे समाज को गंभीरता से ध्यान देने की आवश्यकता है। इस तरह की रिपोर्टें छात्रों की चिंताओं को सामने लाने में मदद कर सकती हैं और संस्थानों को केवल जागरूकता तक सीमित न रहकर, व्यावहारिक, सुलभ और संवेदनशील सहायता प्रदान करने की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित कर सकती हैं।”

देवेश मौदगिल ने कहा कि यह रिपोर्ट पूरे परिसर (कैंपस) के स्तर पर एक ऐसी कार्यप्रणाली अपनाने का सुझाव देती है, जिससे सहायता प्रणाली स्पष्ट रूप से दिखाई दे, मानसिक स्वास्थ्य पर बातचीत सामान्य हो सके, रेफरल प्रक्रियाएं मजबूत हों, और फैकल्टी तथा साथियों के नेटवर्क को इस तरह तैयार किया जाए कि वे रोजमर्रा के जीवन में बेहतर मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा दे सकें।

‘केटावा – सेंटर फॉर बिहेवियर चेंज’ की संस्थापक और CEO, डॉ. निधि जसवाल ने कहा, “संदेश साफ है: जागरूकता को काम में बदलना चाहिए। छात्रों को पता होना चाहिए कि मदद के लिए कहाँ जाना है, वे अपनी चिंताओं पर बात करते समय सुरक्षित महसूस करें, और उन्हें ऐसी मदद मिले जो पूरी तरह गोपनीय हो और जहाँ उन्हें किसी तरह के पूर्वाग्रह या आलोचना का सामना न करना पड़े।” उन्होंने आगे कहा, “मानसिक रूप से सहयोगी कैंपस सिर्फ वह नहीं है जहाँ काउंसलिंग की सुविधा हो, बल्कि वह जगह है जहाँ छात्र बिना किसी आलोचना के डर के मदद के लिए बेझिझक आ सकें।

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