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आधा शैक्षणिक सत्र बीता, अब तक नहीं मिली गणवेश की राशि, 1.47 लाख बच्चे कर रहे इंतजार

सिंगरौली। शैक्षणिक सत्र 2026-27 का आधा समय बीतने को है, परीक्षाएं सिर पर हैं, लेकिन सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छोटे-छोटे बच्चों को अब तक स्कूल की गणवेश (ड्रेस) नसीब नहीं हुई है। मध्यप्रदेश के सिंगरौली जिले में कक्षा 1 से 8 तक के करीब 1 लाख 47 हजार विद्यार्थी आज भी स्कूल ड्रेस मिलने का इंतजार कर रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि अब तक किसी भी विद्यार्थी को गणवेश खरीदने के लिए निर्धारित राशि भी नहीं मिली है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब शैक्षणिक सत्र का आधा समय बीत चुका है, तो आखिर बच्चों को गणवेश कब मिलेगी?

 

जिले के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले हजारों गरीब और जरूरतमंद परिवारों के बच्चों के लिए स्कूल की गणवेश केवल कपड़ा नहीं, बल्कि उनकी पढ़ाई और स्कूल से जुड़ी पहचान का अहम हिस्सा है। लेकिन सरकारी व्यवस्था की सुस्ती के चलते बच्चे अब तक इससे वंचित हैं। कई विद्यार्थी पिछले साल की पुरानी और छोटी हो चुकी ड्रेस पहनकर स्कूल जाने को मजबूर हैं, जबकि कुछ बच्चे सामान्य कपड़ों में ही कक्षाओं में पहुंच रहे हैं। जिन परिवारों की आर्थिक स्थिति कमजोर है, उनके लिए अपने खर्च पर बच्चों की नई ड्रेस खरीदना भी आसान नहीं है।

 

पहले ड्रेस के नाप लिए, फिर बदल गई सरकार की नीति

 

स्कूल शिक्षा विभाग के निर्देशों के अनुसार, शैक्षणिक सत्र की शुरुआत में जुलाई महीने में स्कूलों से विद्यार्थियों की गणवेश के नाप मंगवाए गए थे। शिक्षकों ने बच्चों के नाप लेकर उनकी सूची तैयार की और निर्धारित प्रक्रिया के तहत जानकारी विभाग को उपलब्ध करा दी। इससे अभिभावकों और विद्यार्थियों को उम्मीद थी कि जल्द ही स्कूलों में गणवेश वितरित कर दी जाएगी।

 

हालांकि, इसके बाद सरकार ने गणवेश उपलब्ध कराने की व्यवस्था में बदलाव करते हुए विद्यार्थियों को तैयार ड्रेस देने के बजाय उसके लिए निर्धारित राशि सीधे बैंक खातों में भेजने का निर्णय लिया। यह राशि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से विद्यार्थियों के अभिभावकों के बैंक खातों में भेजी जानी है। नीति में बदलाव के बाद गणवेश वितरण की प्रक्रिया आगे बढ़ने के बजाय भुगतान की व्यवस्था में उलझकर रह गई।

 

91 प्रतिशत से अधिक खातों का सत्यापन, फिर भी राशि का इंतजार

 

विभागीय स्तर पर बच्चों के बैंक खातों के सत्यापन का काम भी बड़े पैमाने पर पूरा किया जा चुका है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जिले के 91 प्रतिशत से अधिक विद्यार्थियों के बैंक खातों का सत्यापन हो चुका है। इसके बावजूद शासन स्तर से बजट जारी नहीं होने के कारण बच्चों के खातों में गणवेश की राशि नहीं पहुंच पाई है।

 

ऐसे में सवाल यह है कि जब अधिकांश विद्यार्थियों के खातों का सत्यापन पूरा हो चुका है, तो भुगतान की प्रक्रिया अब तक क्यों अटकी हुई है? यदि समय रहते बजट जारी कर राशि खातों में भेज दी जाती, तो अभिभावक बच्चों के लिए गणवेश खरीद सकते थे। लेकिन राशि के अभाव में बच्चे अब भी पुरानी ड्रेस या सामान्य कपड़ों में स्कूल जाने को विवश हैं।

 

अभिभावकों को जानकारी नहीं, ड्रेस मिलने की उम्मीद में बैठे परिवार

 

इस पूरे मामले में एक और गंभीर पहलू सामने आ रहा है। कई अभिभावकों को यह जानकारी ही नहीं है कि सरकार ने अब तैयार गणवेश देने के बजाय उसके लिए राशि बैंक खाते में भेजने की व्यवस्था की है। ऐसे परिवार अब भी स्कूल से ड्रेस मिलने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। वहीं, आर्थिक तंगी के कारण वे अपने स्तर पर बच्चों के लिए नई यूनिफॉर्म खरीदने का निर्णय भी नहीं ले पा रहे हैं।

 

इसका सीधा असर स्कूली बच्चों पर पड़ रहा है। जिन बच्चों की पुरानी ड्रेस छोटी हो गई है, उन्हें उसी से काम चलाना पड़ रहा है। वहीं, जिनके पास पहनने के लिए उपयुक्त यूनिफॉर्म नहीं है, वे सामान्य कपड़ों में स्कूल पहुंच रहे हैं। ऐसे में सरकारी योजनाओं का लाभ समय पर बच्चों तक पहुंचाने के दावों पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

 

परीक्षाएं नजदीक, अब कब मिलेगी गणवेश की राशि?

 

फरवरी महीने से परीक्षाएं शुरू होने की संभावना के बीच शैक्षणिक सत्र का महत्वपूर्ण समय बीत रहा है। ऐसे में यदि जल्द ही राशि जारी नहीं की गई, तो बच्चों को पूरे सत्र में गणवेश के लिए इंतजार करना पड़ सकता है। सवाल यह भी है कि जब जुलाई में बच्चों के नाप लेकर सूची तैयार कराई गई थी, तो फिर गणवेश की व्यवस्था समय पर क्यों नहीं हो सकी?

 

सिंगरौली जिले के 1 लाख 47 हजार विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों को अब शासन से बजट जारी होने तथा बैंक खातों में राशि पहुंचने का इंतजार है। जरूरत इस बात की है कि विभागीय प्रक्रिया में तेजी लाकर पात्र विद्यार्थियों को जल्द से जल्द गणवेश की राशि उपलब्ध कराई जाए, ताकि गरीब परिवारों के बच्चों को कम से कम स्कूल ड्रेस के लिए पूरे साल परेशान न होना पड़े।

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