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जयंत-मोरवा मार्ग पर राख से बढ़ी परेशानी, गीली राख ढोने वाले ट्रकों पर उठे सवाल

सड़क पर रिसकर गिर रही राख सूखने के बाद उड़ा रही धूल, एनटीपीसी प्रबंधन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से निगरानी की मांग

सिंगरौली। औद्योगिक नगरी सिंगरौली में राख के परिवहन से होने वाले प्रदूषण को लेकर चिंता बढ़ रही है। जयंत से मोरवा के बीच सड़क पर राख फैलने और राख से लदे ट्रकों से पानी के साथ गीला पदार्थ रिसकर गिरने की शिकायतें सामने आ रही हैं। स्थानीय स्तर पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि एनटीपीसी विंध्याचल और शक्तिनगर संयंत्रों से निकलने वाली राख की ढुलाई में सुरक्षित परिवहन व्यवस्था का पर्याप्त ध्यान नहीं रखा जा रहा है। सड़क पर गिरी गीली राख सूखने के बाद वाहनों की आवाजाही से धूल बनकर उड़ती है, जिससे राहगीरों और आसपास रहने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

राख से सड़कों पर फैल रही गंदगी
स्थानीय लोगों के अनुसार, राख से लदे कुछ मालवाहक ट्रकों से पानी के साथ राख सड़क पर गिरती दिखाई देती है। इससे सड़क पर गीली राख की परत जम जाती है, जो सूखने के बाद वाहनों के गुजरने पर धूल के रूप में उड़ने लगती है। लोगों का कहना है कि जयंत-मोरवा मार्ग सहित दुधिचुआ बैरियर, जयंत बस स्टैंड, सीडब्ल्यूएस गेट, मुड़वानी डैम और सिंगरौली रेलवे स्टेशन की ओर जाने वाले मार्गों पर इस समस्या की जांच की जानी चाहिए।
राख के इस तरह फैलने से सड़क पर फिसलन, दृश्यता में कमी और वायु प्रदूषण जैसी समस्याएं उत्पन्न होने की आशंका रहती है। हालांकि, सड़क पर गिरने वाली राख की वास्तविक मात्रा और उससे होने वाले प्रदूषण के स्तर की पुष्टि संबंधित विभागों की जांच और मापन से ही हो सकेगी।

सुरक्षित परिवहन व्यवस्था पर सवाल
राख के परिवहन के दौरान उसे वाहन से बाहर गिरने और हवा में उड़ने से रोकने के लिए उचित इंतजाम जरूरी हैं। स्थानीय स्तर पर आरोप हैं कि कुछ ट्रकों में गीली राख की ढुलाई के दौरान रिसाव रोकने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होती। ऐसे में सवाल उठता है कि राख परिवहन में लगे वाहनों की स्थिति, उनके ढकाव और परिवहन संबंधी नियमों की नियमित जांच की जा रही है या नहीं।इस मामले में एनटीपीसी प्रबंधन और राख परिवहन से जुड़े ठेकेदारों की भूमिका की जांच किए जाने की मांग की जा रही है। संबंधित संयंत्रों से निकलने वाली राख को निर्धारित स्थान तक पहुंचाने के दौरान पर्यावरणीय मानकों का पालन सुनिश्चित करना आवश्यक है।

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और पुलिस की भूमिका महत्वपूर्ण
जयंत-मोरवा मार्ग पर राख फैलने की शिकायतों के बीच मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से मौके का निरीक्षण कराने और वायु प्रदूषण की स्थिति का आकलन करने की मांग उठ रही है। यदि परिवहन के दौरान नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
इसके साथ ही मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की सीमा पर तैनात संबंधित पुलिस तथा परिवहन विभाग के अधिकारियों से भी राख लदे वाहनों की जांच करने और सड़क पर राख गिरने से रोकने के उपाय सुनिश्चित करने की अपेक्षा की जा रही है।

लोगों ने व्यवस्था सुधारने की मांग की
स्थानीय लोगों का कहना है कि औद्योगिक गतिविधियों और राख के परिवहन के कारण आम नागरिकों को अतिरिक्त परेशानी नहीं होनी चाहिए। सड़क पर राख गिरने की स्थिति में तत्काल सफाई, वाहनों की नियमित जांच और परिवहन के दौरान रिसाव रोकने के इंतजाम किए जाने चाहिए।
अब देखना होगा कि संबंधित प्रशासन, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और एनटीपीसी प्रबंधन इस समस्या पर क्या कदम उठाते हैं। राख के परिवहन से जुड़े वाहनों और मार्गों का निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करना जरूरी है, ताकि प्रदूषण पर नियंत्रण के साथ आम लोगों की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जा सके।

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