5 हजार से अधिक घायल पशुओं का रेस्क्यू, संसाधनों की कमी के बीच गौसेवा संस्थान कर रहा सेवा
इंजीनियरिंग की पढ़ाई के साथ घायल गोवंश और मूक पशुओं की देखभाल में जुटे अभय जैन, संस्थान ने आमजन से सहयोग की अपील की

सिंगरौली। जिले में घायल गोवंश और अन्य मूक पशुओं को बचाने तथा उनका उपचार कराने के लिए गौसेवा संस्थान लगातार कार्य कर रहा है। संस्थान से जुड़े अभय जैन और उनकी टीम अब तक 5 हजार से अधिक रेस्क्यू ऑपरेशन किए जाने का दावा करती है। हालांकि, सीमित संसाधनों और पर्याप्त सहयोग के अभाव में घायल पशुओं के रेस्क्यू, उपचार और देखभाल में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
संस्थान से जुड़े अभय जैन पेशे से इंजीनियर हैं और अपनी पढ़ाई के साथ घायल पशुओं की सेवा में भी जुटे हुए हैं। संस्थान के अनुसार, घायल पशुओं को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने, दवाइयों और भोजन की व्यवस्था करने तथा उनकी देखभाल के लिए लगातार प्रयास किए जाते हैं। इस कार्य में भूसा, दवाइयों, वाहनों और अन्य जरूरी संसाधनों की आवश्यकता बनी रहती है।
देवरा में उपलब्ध है करीब 2 एकड़ जमीन
संस्थान के अनुसार, देवरा में मध्यप्रदेश शासन की लगभग 2 एकड़ जमीन पर घायल पशुओं को रखने और उनकी देखभाल की व्यवस्था की गई है। परिसर में बिजली सहित कुछ सुविधाएं उपलब्ध हैं, लेकिन बढ़ती जरूरतों के अनुसार व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाने के लिए अतिरिक्त संसाधनों की आवश्यकता है। गंभीर रूप से घायल पशुओं को शेल्टर तक लाया जाता है, जबकि कई मामलों में टीम मौके पर पहुंचकर ही उपचार करने का प्रयास करती है।

संस्थान का कहना है कि वर्ष 2023 में तत्कालीन कलेक्टर राजीव रंजन मीणा के कार्यकाल में एक वाहन उपलब्ध कराया गया था, जिसका उपयोग अब भी किया जा रहा है। इसके अलावा, घायल मवेशियों को उठाकर सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने के लिए गुजरात से करीब 16 लाख रुपये कीमत की हाइड्रोलिक गाड़ी उपलब्ध कराए जाने की जानकारी भी दी गई। हाल ही में तत्कालीन कलेक्टर गौरव बैनल के प्रयासों से डॉग एंबुलेंस की व्यवस्था होने से घायल कुत्तों के रेस्क्यू में सहायता मिलने की उम्मीद है।
जिले की गौशालाओं की स्थिति पर उठाए सवाल
संस्थान से जुड़े लोगों ने जिले में गौशालाओं की व्यवस्थाओं को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनके अनुसार, दस्तावेजों में सिंगरौली जिले में 27 गौशालाएं संचालित होने की जानकारी है, लेकिन उनके निरीक्षण में लगभग 4 ही दिखाई दीं। इनमें भी 2 से 3 गौशालाओं की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर बताई गई। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि के लिए संबंधित विभाग द्वारा निरीक्षण और सत्यापन जरूरी है।
चिकित्सकीय सुविधाओं और सहयोग की जरूरत
संस्थान से जुड़े लोगों के अनुसार, पहले की तुलना में कुछ व्यवस्थाओं में सुधार हुआ है और पशु चिकित्सकों की उपलब्धता भी बढ़ी है। इसके बावजूद निर्धारित समय के बाद घायल पशुओं के उपचार की व्यवस्था करना चुनौतीपूर्ण बना रहता है। रेस्क्यू कार्य के लिए प्रशिक्षित सहयोगियों, वाहनों और चिकित्सा सुविधाओं की जरूरत लगातार बनी हुई है।
संस्थान का कहना है कि कई लोग सहयोग का आश्वासन देते हैं, लेकिन अपेक्षित मदद नहीं मिल पाती। वहीं, बेंगलुरु और गाजियाबाद जैसे शहरों में रहने वाले कुछ लोग आर्थिक सहयोग कर रहे हैं। संस्थान ने स्थानीय नागरिकों, जनप्रतिनिधियों और समाजसेवियों से अपील की है कि वे देवरा स्थित परिसर में पहुंचकर व्यवस्थाओं का प्रत्यक्ष निरीक्षण करें और जरूरतों को समझकर सहयोग करें।
गौसेवा संस्थान के अनुसार, घायल पशुओं की सेवा किसी व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं, बल्कि बेजुबान जीवों की रक्षा के उद्देश्य से की जा रही है। इस कार्य को बेहतर ढंग से संचालित करने के लिए आर्थिक सहायता के साथ श्रमदान, दवाइयां, भूसा, वाहन और अन्य आवश्यक संसाधनों की जरूरत है। संस्थान ने लोगों से अपील की है कि वे अपनी क्षमता के अनुसार सहयोग कर घायल पशुओं के रेस्क्यू और उपचार में भागीदारी निभाएं।













