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ब्रह्माकुमारीज़ के तपोवन परिसर में चैतन्य देवियों की मनोहर झांकी देखने उमड़ा जनसैलाब

महाआरती में शामिल हुए प्रशासनिक अधिकारी, समाजसेवी एवं गणमान्य नागरिक; दशहरे पर सजा श्रीराम दरबार, रावण दहन के साथ हुआ समापन

सिंगरौली। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के तपोवन परिसर, विंध्यनगर में शारदीय नवरात्रि के अवसर पर आयोजित चैतन्य देवियों की मनोहर झांकी का 20 अक्टूबर को भव्य समापन हुआ। 16 अक्टूबर से 20 अक्टूबर तक प्रतिदिन शाम 7 बजे से रात्रि 10 बजे तक आयोजित इस झांकी को देखने के लिए नगर एवं आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। चैतन्य देवियों के दिव्य स्वरूपों के दर्शन और महाआरती में शामिल होने के लिए प्रतिदिन जनसैलाब उमड़ता रहा।

झांकी में मां दुर्गा के विभिन्न दिव्य स्वरूपों का मनोहारी चित्रण किया गया। एकाग्रता, तपस्या और आध्यात्मिक साधना के माध्यम से प्रस्तुत चैतन्य देवियों के स्वरूपों ने पूरे परिसर में अलौकिक एवं आध्यात्मिक वातावरण निर्मित कर दिया। देवियों की आकर्षक एवं जीवंत प्रस्तुतियों को देखकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे और एकटक निहारते रह गए।

गणमान्य नागरिकों ने की महाआरती

आयोजन के दौरान सिंगरौली जिले के संयुक्त कलेक्टर श्री संजीव कुमार पांडेय, कथावाचक श्रीमती विजय लक्ष्मी जी, आरोग्य भारती महाकौशल प्रांत की उपाध्यक्ष श्रीमती आशा गुप्ता जी, महिला महाविद्यालय के प्राचार्य श्री शंभू रत्न जी सहित अनेक समाजसेवी, गणमान्य नागरिक एवं बुद्धिजीवी वर्ग के लोग उपस्थित रहे। सभी ने चैतन्य देवियों के दर्शन कर महाआरती में भाग लिया और आध्यात्मिक वातावरण का लाभ प्राप्त किया।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां

झांकी के दौरान विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया। विंध्याचल समिति के भाई-बहनों ने मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर उपस्थित जनसमूह को भावविभोर किया। गरबा नृत्य के आयोजन ने उत्सव के उल्लास को और बढ़ा दिया। श्रद्धालुओं ने भक्ति, संस्कृति और आध्यात्मिकता के इस अनूठे संगम का आनंद लिया।

दशहरे पर सजा श्रीराम दरबार, रावण दहन से दिया बुराइयों को त्यागने का संदेश

विजयादशमी के पावन अवसर पर परिसर में श्रीराम दरबार सजाया गया। इसके साथ ही बुराइयों के प्रतीक रावण का दहन किया गया। इस आयोजन के माध्यम से बुराइयों पर अच्छाई की विजय, सत्य की शक्ति और जीवन में नैतिक एवं आध्यात्मिक मूल्यों को अपनाने का संदेश दिया गया।

तपोवन परिसर में आयोजित चैतन्य देवियों की यह झांकी श्रद्धा, भक्ति, भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना का सुंदर संगम बनी। पांच दिनों तक चले इस आयोजन ने श्रद्धालुओं को देवी स्वरूपों के दर्शन के साथ-साथ जीवन में श्रेष्ठ संस्कारों, सकारात्मकता और आध्यात्मिकता को अपनाने की प्रेरणा दी।

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