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मनीमाजरा आर्य समाज का पुनर्गठन, महत्वपूर्ण विषयों पर हुआ विचार-विमर्श-

मनोज शर्मा,चंडीगढ़। आर्य समाज को पुनः सुचारू एवं व्यवस्थित रूप से संचालित करने की दिशा में आयोजित यज्ञ कार्यक्रम श्रद्धा और उत्साह के साथ संपन्न हुआ। न्यू दर्शनी बाग, पुरानी रोपड़ रोड, मनीमाजरा में यज्ञ का आयोजन किया गया। इस अवसर पर आर्य समाज की नई कार्यकारिणी का गठन किया गया तथा संगठन को सक्रिय, सशक्त और सुव्यवस्थित बनाने के लिए विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श हुआ। कार्यकारिणी में सत्यकाम अग्रवाल को प्रधान नियुक्त किया गया। धर्म बीर बतरा, प्रधान, आर्य समाज सेक्टर-9, पंचकूला तथा सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य रमेश चंद जीवन को सलाहकार एवं मार्गदर्शक की जिम्मेदारी सौंपी गई।

 

डॉ. विनोद कुमार को वरिष्ठ उपप्रधान, सूर्यकांत को उपप्रधान, रमेश आर्य को मंत्री, कृष्णा बंसल को उपमंत्री, गुलशन स्वरूप कालड़ा को कोषाध्यक्ष, भारत भूषण गुप्ता को लेखा परीक्षक तथा विश्व भारती को कानूनी सलाहकार बनाया गया। अंतरंग सभा के सदस्य के रूप में अशोक छाबड़ा, रविंदर गोयल, अंकित अग्रवाल, डॉ. भूपेंद्र गुप्ता, आशीम बंसल, सुरेश आर्य तथा गीतू आर्य शामिल किए गए। कार्यकारिणी के पदाधिकारी भी अंतरंग सभा के सदस्य होंगे।बैठक में आर्य समाज के विस्तार एवं पुनर्सक्रियता के लिए नए सदस्यों को जोड़ने, वार्षिक सदस्यता शुल्क निर्धारित करने तथा बैंक खातों को पुनः चालू करवाने जैसे विषयों पर चर्चा की गई। इसके अतिरिक्त, आर्य समाज की अपनी भूमि एवं भवन को संस्था के नियंत्रण में लेने के उद्देश्य से सभी संभावित प्रयास करने पर भी सहमति व्यक्त की गई। उपस्थित सदस्यों ने संगठनात्मक व्यवस्था को मजबूत करने तथा महर्षि दयानंद सरस्वती के सिद्धांतों और विचारों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।

 

कार्यक्रम में आर्य समाज के अनेक अनुभवी एवं विशिष्ट सदस्य उपस्थित रहे। इनमें धर्म बीर बतरा, पिछले 20 वर्षों से आर्य समाज सेक्टर-9, पंचकूला के प्रधान; बोध राम धीमान, सेक्टर-22, चंडीगढ़ के पूर्व प्रधान एवं मंत्री (1990–2004); महेंद्र नाथ चौहान, पूर्व कोषाध्यक्ष, सेक्टर-9, पंचकूला; राकेश नांगिया, वरिष्ठ सदस्य, सेक्टर-9, पंचकूला; धर्म पाल आर्य, कोषाध्यक्ष, सेक्टर-12, पंचकूला; लाल चंद रामचंदानी तथा अवनि कुमार गुप्ता शामिल रहे।कार्यक्रम का उद्देश्य मनी माजरा में आर्य समाज की गतिविधियों को निरंतर गति देना, अधिक से अधिक आर्य परिवारों को जोड़ना तथा वैदिक विचारधारा के प्रचार-प्रसार के माध्यम से समाज में नैतिक मूल्यों, शिक्षा और संस्कारों को प्रोत्साहित करना रहा। नई कार्यकारिणी से आशा व्यक्त की गई कि वह सभी सदस्यों के सहयोग से आर्य समाज को नई दिशा प्रदान करेगी और महर्षि दयानंद सरस्वती के दिखाए मार्ग पर आगे बढ़ेगी।

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