अमिलिया कोल माइंस की आरएंडआर कॉलोनी में स्कूल उद्घाटन का विरोध, विस्थापितों ने उखाड़े झंडे-बैनर

सिंगरौली। टीएचडीसी अमिलिया कोल माइंस की आरएंडआर कॉलोनी तेंदूडोल में प्रस्तावित विद्यालय के उद्घाटन को लेकर विस्थापित ग्रामीणों ने विरोध जताया। बुधवार को विद्यालय के उद्घाटन से पहले नाराज ग्रामीणों ने झंडे-बैनर उखाड़कर फेंक दिए। विस्थापितों का कहना है कि उन्हें सरस्वती शिशु मंदिर के नाम से विद्यालय खोलना मंजूर नहीं है। उनकी मांग है कि कॉलोनी में डीएवी या डीपीएस जैसे प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान का स्कूल खोला जाए, जहां नर्सरी से लेकर 12वीं तक पढ़ाई की सुविधा एक ही परिसर में उपलब्ध हो।
विस्थापित नेता एवं पीडरवाह के सरपंच छोटे सिंह मरावी ने कहा कि स्थानीय विस्थापितों की मांगों को नजरअंदाज कर विद्यालय का उद्घाटन करने की कोशिश की गई। उनका आरोप है कि इस संबंध में सरपंच सहित किसी भी स्थानीय जनप्रतिनिधि को सूचना नहीं दी गई। ग्रामीणों ने इसे विस्थापितों की भावनाओं की अनदेखी बताते हुए विरोध किया। इस दौरान बड़ी संख्या में विस्थापित ग्रामीण मौजूद रहे।
डीएवी या डीपीएस स्कूल खोलने की मांग
छोटे सिंह मरावी ने कहा कि विस्थापित परिवार चाहते हैं कि उनके बच्चों को बेहतर शिक्षा मिले। इसके लिए नर्सरी से 12वीं तक की पढ़ाई की व्यवस्था वाला विद्यालय खोला जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि विस्थापितों को सरस्वती शिशु मंदिर स्वीकार नहीं है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो वे आगे भी संघर्ष करेंगे।
अस्पताल को 24 घंटे चालू रखने की मांग
विस्थापित नेता ने आरएंडआर कॉलोनी तेंदूडोल में संचालित अस्पताल की व्यवस्थाओं पर भी सवाल उठाए। उन्होंने मांग की कि अस्पताल 24 घंटे खुला रहे, दो डॉक्टरों की तैनाती सुनिश्चित की जाए और एंबुलेंस भी हर समय उपलब्ध रहे, ताकि आपात स्थिति में विस्थापित परिवारों को तत्काल चिकित्सा सुविधा मिल सके।
ग्रामीणों का कहना है कि पुनर्वास कॉलोनी में शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाएं उनकी जरूरतों के अनुरूप उपलब्ध कराई जानी चाहिए। अब देखना होगा कि टीएचडीसी प्रबंधन विस्थापितों की मांगों पर क्या कदम उठाता है और विद्यालय को लेकर उपजे विवाद का समाधान कैसे किया जाता है।













