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दुर्गा विसर्जन के दौरान दो गुटों में टकराव, पुलिस की निगरानी में हुआ विसर्जन

जबलपुर. एमपी के जबलपुर में बेलखेड़ा स्थित ग्राम कुंडा कला में बुधवार देर रात दुर्गा प्रतिमा के विसर्जन को लेकर दो पक्षों के बीच विवाद और तनाव की स्थिति निर्मित हो गई. गाँव में पहली बार माता की प्रतिमा स्थापित करने वाले सिलावट समाज का आरोप है कि जब वे विसर्जन जुलूस निकाल रहे थे, तब राजपूत समाज के लोगों ने उन्हें रास्ते में रोक दिया. इस गतिरोध के कारण माता की झांकी करीब 4 से 5 घंटे तक सड़क पर ही खड़ी रही. हालांकि, पुलिस प्रशासन ने मौके पर पहुँचकर स्थिति को संभाला और बाद में शांतिपूर्वक विसर्जन संपन्न कराया.

करीब 2500 से 3000 की आबादी वाले कुंडा कला गाँव में पारंपरिक रूप से हर साल राजपूत समाज द्वारा ही दुर्गा माता की स्थापना की जाती रही है. इस वर्ष सिलावट समाज के युवाओं ने भी गाँव में अलग से माता रानी की प्रतिमा स्थापित करने का निर्णय लिया था. सिलावट समाज के लोगों का कहना है कि प्रतिमा स्थापना के समय से ही कुछ स्थानीय लोगों द्वारा इसका विरोध किया जा रहा था, लेकिन किसी तरह प्रतिमा स्थापित कर पूजा-अर्चना की गई.

बुधवार देर रात करीब 3 बजे सिलावट समाज के लोग ढोल-धमाकों के साथ प्रतिमा को विसर्जन के लिए नदी की ओर ले जा रहे थे. आरोप है कि इसी दौरान दूसरे पक्ष के लोगों ने यह कहते हुए जुलूस को रोक दिया कि गाँव में परंपरा के अनुसार केवल एक ही स्थान पर माता की स्थापना होती आई है. सड़क पर झांकी रोके जाने के बाद दोनों पक्षों के बीच बहस बढ़ गई. सूचना मिलने पर बेलखेड़ा थाना पुलिस मौके पर पहुँची, लेकिन तुरंत कोई सहमति नहीं बन सकी. इससे नाराज होकर सिलावट समाज के प्रतिनिधि बेलखेड़ा थाने पहुँचे और मामले की लिखित शिकायत दर्ज कराई. शिकायतकर्ताओं ने थाने के बाहर धरना भी दिया. घटना की जानकारी मिलते ही समाजसेवी अभय प्रताप सिंह भी थाने पहुँचे और धार्मिक स्वतंत्रता के हनन का विरोध करते हुए आरोपियों पर सख्त कार्रवाई की माँग की.

दूसरा पक्ष ने आरोपो को किया खारिज-

दूसरी ओर, राजपूत समाज के प्रतिनिधि राजकुमार सिंह राजपूत ने सभी आरोपों को खारिज किया है. उनका कहना है कि किसी को विसर्जन से नहीं रोका गया. आपत्ति केवल इस बात पर थी कि दोनों जुलूस एक साथ संकरी गली से निकलेंगे तो अव्यवस्था और विवाद की स्थिति बन सकती है. उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि उन्हें कोई आपत्ति होती, तो वे स्थापना के समय ही विरोध दर्ज कराते. मामले पर एसडीओपी आशुतोष द्विवेदी ने जानकारी दी कि गांव में कोई बड़ा सांप्रदायिक विवाद नहीं हुआ है. संकरी गली होने के कारण एक साथ दो जुलूस निकलना संभव नहीं था, जिससे कुछ समय के लिए रुकावट आई. गुरुवार को पुलिस बल की मौजूदगी में दोनों प्रतिमाओं का शांतिपूर्ण और गरिमापूर्ण तरीके से जल विसर्जन करा दिया गया. स्थानीय विधायक नीरज सिंह ने भी पुष्टि की कि प्रशासन के हस्तक्षेप से मामला सुलझा लिया गया है.

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