टाइगर श्रॉफ कार फायरिंग: लॉरेंस गैंग का ‘हथियार रूट’ डिकोड, ‘डेड लेटर बॉक्स’ और दो महिलाओं के जरिए पंजाब से मुंबई पहुंची थी पिस्टल

मुंबई/दिल्ली:बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर हुई फायरिंग की घटना में जांच एजेंसियों ने हथियारों की सप्लाई को लेकर एक बड़ा खुलासा किया है। मुंबई पुलिस की जांच में सामने आया है कि वारदात में इस्तेमाल की गई पिस्टल और 20 कारतूस पंजाब के अमृतसर से जुटाकर मुंबई पहुंचाए गए थे। दिल्ली पुलिस ने इस सप्लाई चेन का भंडाफोड़ करते हुए मंगलवार को चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें दो महिलाएं भी शामिल हैं। इससे पहले इस मामले में तीन संदिग्धों को राजस्थान के कोटा से पकड़ा गया था।
इस तरह बुना गया हथियारों की सप्लाई का पूरा जाल:
जेल से बाहर आते ही गैंग के संपर्क में आया आरोपी:
मुख्य आरोपी कुणाल (21, निवासी सोनीपत) जुलाई में सोनीपत जेल से बाहर आया था। इसके बाद एक दोस्त के जरिए उसकी मुलाकात लॉरेंस गैंग के गुर्गे अनिल पंडित से हुई। पुलिस के अनुसार, विदेश में बैठा अनिल पंडित एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप के जरिए इस पूरी वारदात को निर्देशित कर रहा था।
अमृतसर में ‘डेड लेटर बॉक्स’ से उठाए गए हथियार:
अनिल के निर्देश पर कुणाल ने अपने साथी सुमित (19) को साथ लिया और अमृतसर पहुंचा। वहां एक निर्धारित गुप्त स्थान पर पिस्टल और 20 कारतूस रखे गए थे। सीधे संपर्क से बचने और पहचान छिपाने के लिए ‘डेड लेटर बॉक्स’ तरीके का इस्तेमाल किया गया, जहां हथियार रखने वाले और उठाने वाले कभी आमने-सामने नहीं आते।
दो महिलाओं के जरिए ट्रेन से हुई डिलीवरी:
हथियारों को सुरक्षित मुंबई पहुंचाने के लिए कुणाल ने यूपी निवासी राधा (23) और बबीता (23) का इस्तेमाल किया। ये दोनों सोनीपत की एक फैक्ट्री में काम करती थीं। 15 अक्टूबर को कुणाल इन्हें नई दिल्ली रेलवे स्टेशन ले गया। राधा के बैग में पिस्टल रखकर दोनों को ट्रेन से मुंबई रवाना कर दिया गया। रास्ते भर कुणाल एन्क्रिप्टेड ऐप के जरिए महिलाओं और अनिल पंडित के संपर्क में रहा।
दादर में नाबालिग ने रिसीव किया हथियारों का बैग:
17 अक्टूबर को राधा और बबीता मुंबई के दादर रेलवे स्टेशन पहुंचीं और पास ही एक होटल में ठहर गईं। उसी दिन सुबह करीब 11 बजे एक नाबालिग लड़का वहां पहुंचा और राधा से हथियारों से भरा बैग लेकर चला गया। जांचकर्ताओं को शक है कि यह वही नाबालिग हो सकता है जिसे कोटा से गिरफ्तार किया गया है।
फंडिंग और शूटरों को निकालने का प्लान:
पुलिस के मुताबिक, इस पूरी व्यवस्था के लिए अनिल पंडित ने 70 से 80 हजार रुपये भेजे थे, जिसमें से करीब 10 से 12 हजार रुपये युवतियों को दिए गए। 18 अक्टूबर की शाम 7 बजे टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग हुई, जिसमें उनका ड्राइवर घायल हो गया। वारदात के बाद शूटर मुंबई में ही फंस गए थे, जिन्हें सुरक्षित शहर से बाहर निकालने की जिम्मेदारी भी अनिल ने कुणाल को ही सौंपी थी। इसी बीच दोनों महिलाएं दादर से हरिद्वार की ट्रेन पकड़कर वहां से निकल गई थीं।
पुलिस अब आरोपियों की आवाजाही, मोबाइल लोकेशन और बैंक ट्रांजेक्शन के आधार पर लॉरेंस गैंग के इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है।













