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AI चिप्स को ‘कूल’ रखेगी भारतीय तकनीक: IIT मद्रास के पूर्व छात्र के स्टार्टअप ने जुटाए 9 मिलियन डॉलर

नई दिल्ली:आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते उपयोग के बीच डेटा सेंटरों और सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री की सबसे बड़ी समस्या— चिप्स का अत्यधिक गर्म होना —को सुलझाने के लिए एक भारतीय प्रतिभा ने बड़ा कदम उठाया है। IIT मद्रास के पूर्व छात्र आकाश रामदास के डीप-टेक स्टार्टअप ‘Discovered Materials’ ने 9 मिलियन डॉलर (करीब 80 करोड़ रुपये) की सीड फंडिंग हासिल की है। यह कंपनी AI की ही मदद से ऐसे नए मैटेरियल्स (पदार्थों) की खोज कर रही है, जो शक्तिशाली AI चिप्स से निकलने वाली गर्मी (हीट) को प्रभावी ढंग से नियंत्रित कर सकें।

क्या है AI चिप्स के गर्म होने की समस्या?
बड़े AI मॉडल्स को ट्रेन करने और चलाने के लिए डेटा सेंटरों में भारी कंप्यूटिंग क्षमता वाले शक्तिशाली प्रोसेसर (चिप्स) लगाए जाते हैं। तेज गति से गणना करने के कारण ये चिप्स बहुत अधिक गर्मी पैदा करते हैं। तापमान एक सीमा से अधिक बढ़ने पर चिप्स की गति कम हो जाती है (जिसे थर्मल थ्रॉटलिंग कहा जाता है) और परफॉर्मेंस गिर जाती है। वर्तमान में इस गर्मी को कंट्रोल करने के लिए पंखे, हीट सिंक और लिक्विड कूलिंग का इस्तेमाल होता है, जिसके संचालन में भारी बिजली खर्च होती है और लागत बढ़ती है।

AI से कैसे होगी नए मैटेरियल की खोज?
पारंपरिक मटेरियल साइंस में किसी नए पदार्थ की खोज, अलग-अलग रासायनिक संयोजनों के प्रयोग और उनके प्रयोगशाला परीक्षण में बहुत लंबा समय लगता है। ‘Discovered Materials’ इस लंबी और जटिल प्रक्रिया को AI और कंप्यूटेशनल मॉडल्स के जरिए तेज कर रहा है।
कंपनी का AI सिस्टम उपलब्ध वैज्ञानिक डेटा और रासायनिक संरचनाओं का विश्लेषण कर ऐसे संयोजनों की पहचान करेगा, जिनकी तापीय चालकता (थर्मल कंडक्टिविटी), स्थिरता और विद्युत गुण सेमीकंडक्टर के लिए सबसे बेहतर हों। इससे वैज्ञानिकों को लैब में केवल सबसे सटीक और उपयोगी विकल्पों का ही परीक्षण करना पड़ेगा।

9 मिलियन डॉलर की फंडिंग का कहां होगा इस्तेमाल?
प्राप्त सीड फंडिंग का उपयोग स्टार्टअप मुख्य रूप से तीन क्षेत्रों में करेगा:

रिसर्च और डेवलपमेंट (R&D) का विस्तार: नए मैटेरियल की खोज के लिए AI मॉडल और कंप्यूटेशनल टूल को और अधिक उन्नत बनाना।

एक्सपर्ट टीम का निर्माण: मटेरियल साइंस, केमिस्ट्री, मशीन लर्निंग और सेमीकंडक्टर इंजीनियरिंग के विशेषज्ञों की एक मजबूत टीम तैयार करना, ताकि लैब टेस्टिंग और AI के बीच बेहतर तालमेल हो सके।

औद्योगिक सहयोग: सेमीकंडक्टर कंपनियों और मटेरियल निर्माताओं के साथ मिलकर नए पदार्थों का वास्तविक औद्योगिक परिस्थितियों और चिप डिजाइन में परीक्षण करना।

भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए यह एक बेहद सकारात्मक संकेत है। जहां अधिकांश स्टार्टअप केवल सॉफ्टवेयर या डिजिटल सेवाओं तक सीमित रहते हैं, वहीं मटेरियल साइंस और सेमीकंडक्टर तकनीक जैसे ‘डीप-टेक’ क्षेत्र में आकाश रामदास की यह पहल भविष्य के डेटा सेंटर और AI इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए गेमचेंजर साबित हो सकती है।

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