उड़ने वाली कार के प्रदर्शन से मस्क ने दुनिया का खींचा ध्यान, चीन की इलेक्ट्रिक कार कंपनियों को टक्कर देने की तैयारी में टेस्ला

टेक्सास। इलेक्ट्रिक कार निर्माता टेस्ला के प्रमुख एलन मस्क ने अपनी नई पीढ़ी की रोडस्टर स्पोर्ट्स कार के प्रदर्शन से ऑटोमोबाइल उद्योग में नई बहस छेड़ दी है। जेट फाइटर जैसी डिजाइन और रॉकेट थ्रस्टर की मदद से हवा में उछलने वाले प्रदर्शन ने इस कार को सुर्खियों में ला दिया है। हालांकि, इस प्रदर्शन से यह साबित नहीं होता कि कार सामान्य सड़कों पर उड़ सकेगी या इसकी सभी तकनीकें व्यावसायिक मॉडल में उपलब्ध होंगी।
इस घटनाक्रम को टेस्ला की भविष्य की रणनीति और चीन की तेजी से बढ़ती इलेक्ट्रिक वाहन इंडस्ट्री के बीच प्रतिस्पर्धा के रूप में भी देखा जा रहा है। चीन की कंपनियां कम लागत पर बड़ी संख्या में इलेक्ट्रिक कारें तैयार कर वैश्विक बाजार में अपनी स्थिति मजबूत कर रही हैं। ऐसे में टेस्ला के सामने तकनीकी नवाचार के साथ उत्पादन और कीमत के मोर्चे पर भी प्रतिस्पर्धी बने रहने की चुनौती है।
रॉकेट थ्रस्टर वाली रोडस्टर ने बटोरी सुर्खियां
रिपोर्ट के मुताबिक, मस्क ने 15 अक्टूबर को टेक्सास के वाको के पास एक रॉकेट सुविधा में नई रोडस्टर का प्रदर्शन किया। इस दौरान कार को विशेष सक्शन सिस्टम की मदद से जमीन से करीब 69 फीट ऊपर उल्टा लटकाकर दिखाया गया। इसके बाद ठंडी गैस से चलने वाले रॉकेट थ्रस्टर की मदद से हवा में उछलने और घूमने जैसे प्रदर्शन भी प्रस्तुत किए गए।
करीब एक दशक से चर्चा में रही इस कार के उत्पादन को लेकर अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है। मस्क ने 2028 में उत्पादन शुरू होने की बात कही है, लेकिन कार में प्रदर्शित सभी सुविधाओं के साथ बड़े पैमाने पर उत्पादन संभव होगा या नहीं, इस पर सवाल कायम हैं।
चीन की कम लागत वाली कारों से बढ़ी चुनौती
वैश्विक इलेक्ट्रिक वाहन बाजार में चीन की कंपनियों की ताकत लगातार बढ़ रही है। बड़े पैमाने पर उत्पादन, बैटरी तकनीक और इलेक्ट्रॉनिक्स में क्षमता के कारण चीनी वाहन निर्माता अपेक्षाकृत कम लागत पर कारें तैयार कर पा रहे हैं। इससे यूरोप और अमेरिका की कंपनियों पर प्रतिस्पर्धी कीमतों पर वाहन उतारने का दबाव बढ़ा है।
रिपोर्ट में कंसल्टिंग फर्म एलिक्सपार्टनर्स के अध्ययन का हवाला देते हुए कहा गया है कि चीन में बनी इलेक्ट्रिक कार की उत्पादन लागत यूरोप में बने समकक्ष वाहन की तुलना में लगभग 11,000 डॉलर कम हो सकती है। यदि यह अंतर बना रहता है, तो पश्चिमी कंपनियों के लिए कीमत के आधार पर मुकाबला करना मुश्किल हो सकता है।
यूरोप में चीनी ब्रांडों की बढ़ती मौजूदगी भी इस बदलाव का संकेत है। ऐसे में टेस्ला जैसी कंपनियां प्रीमियम वाहनों, अत्याधुनिक तकनीक और नए कारोबारी मॉडल के जरिए अपनी अलग पहचान मजबूत करने की कोशिश कर रही हैं।
कारों से आगे रोबोटिक्स और रोबोटैक्सी पर नजर
टेस्ला की रणनीति अब केवल इलेक्ट्रिक कारों तक सीमित नहीं है। कंपनी रोबोटिक्स, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और बिना चालक चलने वाले वाहनों पर भी ध्यान दे रही है। मस्क ने साइबरकैब नाम का स्वचालित वाहन पेश किया है, जिसे कंपनी की रोबोटैक्सी योजना का हिस्सा बताया गया है।
हालांकि, इस क्षेत्र में सफलता केवल प्रदर्शन से तय नहीं होगी। इसके लिए सुरक्षा, नियामकीय मंजूरी, उत्पादन क्षमता, लागत और ग्राहकों के वास्तविक इस्तेमाल जैसे पहलू महत्वपूर्ण होंगे। रोबोटैक्सी सेवा को बड़े पैमाने पर विस्तार देना भी कंपनी के सामने बड़ी चुनौती है।
2017 में पेश हुई थी नई रोडस्टर
टेस्ला ने नई पीढ़ी की रोडस्टर को पहली बार 2017 में प्रदर्शित किया था। उस समय कंपनी मॉडल 3 का उत्पादन बढ़ाने की चुनौती से जूझ रही थी। रोडस्टर के जरिए टेस्ला ने यह संकेत दिया था कि वह सामान्य इलेक्ट्रिक कारों के साथ उच्च श्रेणी की स्पोर्ट्स कार भी तैयार कर सकती है। हालांकि, वाहन के बाजार में आने की शुरुआती समयसीमा पूरी नहीं हो सकी।
अब करीब 9 साल बाद रोडस्टर एक बार फिर चर्चा में है, लेकिन इस बीच वैश्विक ऑटो उद्योग में प्रतिस्पर्धा काफी बदल चुकी है। चीन की कंपनियां उत्पादन और लागत के मोर्चे पर आगे बढ़ी हैं, जबकि पश्चिमी वाहन निर्माता प्रीमियम सेगमेंट और नई तकनीकों में निवेश कर रहे हैं।
भविष्य की ऑटो रेस में तकनीक के साथ लागत भी अहम
टेस्ला की नई रोडस्टर ने भविष्य की कारों को लेकर उत्सुकता बढ़ाई है, लेकिन वैश्विक ऑटो उद्योग की असली प्रतिस्पर्धा उत्पादन क्षमता, लागत और तकनीकी उपयोगिता पर निर्भर करेगी। चीन की कंपनियां कम कीमत वाले इलेक्ट्रिक वाहनों के जरिए बाजार में अपनी पकड़ मजबूत कर रही हैं। दूसरी ओर, टेस्ला जैसी कंपनियां रोबोटिक्स, स्वचालित वाहनों और प्रीमियम तकनीक के सहारे आगे बढ़ने की कोशिश में हैं।
रोडस्टर कब और किन सुविधाओं के साथ बाजार में आएगी, यह अभी स्पष्ट नहीं है। आने वाले वर्षों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि टेस्ला अपनी तकनीकी महत्वाकांक्षाओं को व्यावसायिक सफलता में कितना बदल पाती है और चीन की कंपनियों से मिल रही चुनौती का किस तरह जवाब देती है।













