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जंतर-मंतर हिंसा की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट की समिति ने खोला पोर्टल, गोपनीय शिकायत और साक्ष्य अपलोड करने की सुविधा

पेलेट गन के कथित इस्तेमाल, महिला प्रदर्शनकारियों से दुर्व्यवहार, पुलिस पर हमले और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोपों की होगी जांच; ऑनलाइन के साथ डाक और व्यक्तिगत रूप से भी दे सकेंगे शिकायत

नई दिल्ली। जंतर-मंतर और दिल्ली के अन्य स्थानों पर जुलाई 2026 में हुए प्रदर्शनों के दौरान हिंसा, पेलेट गन के कथित इस्तेमाल और पुलिस तथा प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित उच्चस्तरीय जांच समिति ने ऑनलाइन पोर्टल शुरू किया है। इसके माध्यम से प्रभावित लोग, प्रत्यक्षदर्शी और अन्य संबंधित पक्ष अपनी शिकायतें, अभ्यावेदन और साक्ष्य जमा कर सकेंगे। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 17 अक्टूबर को पोर्टल शुरू किए जाने की जानकारी दी।

पोर्टल http://hpec.nic.in के माध्यम से शिकायत दर्ज करने के साथ फोटो, वीडियो, मेडिकल रिपोर्ट और घटना से जुड़े अन्य दस्तावेज अपलोड किए जा सकते हैं। शिकायतकर्ता अपनी पहचान गोपनीय रखने का विकल्प भी चुन सकते हैं। समिति की जांच में प्रदर्शन के दौरान पेलेट गन के कथित इस्तेमाल, महिला प्रदर्शनकारियों को निशाना बनाए जाने और उनके साथ कथित दुर्व्यवहार, पुलिसकर्मियों पर हमले तथा सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसे मामलों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

शिकायत और साक्ष्य जमा करने के लिए चार विकल्प

गृह मंत्रालय के अनुसार, पोर्टल पर अलग-अलग परिस्थितियों के लिए 4 विकल्प उपलब्ध कराए गए हैं। पहला विकल्प उन लोगों के लिए है, जो प्रदर्शन के दौरान स्वयं प्रभावित हुए, जिनमें पुलिसकर्मी और अन्य सुरक्षा बलों के जवान भी शामिल हैं। दूसरा विकल्प उन लोगों के लिए है, जो अपनी पहचान गोपनीय रखते हुए शिकायत या जानकारी देना चाहते हैं। तीसरे विकल्प के जरिए अन्य सूचनाएं गोपनीय रूप से साझा की जा सकती हैं, जबकि चौथा विकल्प समिति को सुझाव देने के लिए है।

शिकायतकर्ता घटना से संबंधित फोटो, वीडियो, चोटों की तस्वीरें और मेडिकल दस्तावेज अपलोड कर सकते हैं। पोर्टल पर यौन उत्पीड़न से संबंधित जानकारी दर्ज करने की सुविधा भी दी गई है, ताकि संवेदनशील शिकायतों को अलग से दर्ज किया जा सके। हालांकि, शिकायत दर्ज होने मात्र से किसी आरोप की पुष्टि नहीं मानी जाएगी। समिति उपलब्ध दस्तावेजों और संबंधित पक्षों के बयानों के आधार पर मामलों की जांच करेगी।

डाक, ईमेल और व्यक्तिगत रूप से भी दे सकेंगे शिकायत

जो लोग ऑनलाइन पोर्टल का इस्तेमाल नहीं कर सकते, उनके लिए शिकायत जमा करने के अन्य माध्यम भी उपलब्ध हैं। गृह मंत्रालय के मुताबिक, शिकायत और अभ्यावेदन नई दिल्ली स्थित समिति के कार्यालय में व्यक्तिगत रूप से जमा किए जा सकते हैं।

समिति का कार्यालय शिक्षा सदन, 17, राउज एवेन्यू इंस्टीट्यूशनल एरिया, नई दिल्ली-110002 में स्थित है। वहां कार्यदिवसों में दोपहर 2 बजे से शाम 4 बजे के बीच आवेदन जमा किए जा सकते हैं। इसके अलावा, इसी पते पर डाक से शिकायत भेजने और hpec2026.enquiry@nic.in पर ईमेल करने की सुविधा भी दी गई है।

पेलेट गन के कथित इस्तेमाल पर विशेष नजर

जुलाई में हुए प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा बलों द्वारा पेलेट गन के इस्तेमाल के आरोप सामने आए थे। समाचार रिपोर्टों में कुछ प्रदर्शनकारियों को पेलेट से चोट लगने की बात कही गई थी। अब समिति यह जांच करेगी कि पेलेट गन का इस्तेमाल किन परिस्थितियों में हुआ, क्या बल प्रयोग आवश्यक और अनुपातिक था तथा इससे लोगों को किस तरह की चोटें आईं।

महिला प्रदर्शनकारियों को निशाना बनाए जाने और उनके साथ कथित दुर्व्यवहार के आरोप भी जांच के दायरे में हैं। ऐसे मामलों में शिकायतकर्ताओं की पहचान गोपनीय रखने की सुविधा महत्वपूर्ण मानी जा रही है। आरोपों की पुष्टि संबंधित बयान, मेडिकल रिपोर्ट, फोटो, वीडियो और अन्य साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही हो सकेगी।

पुलिस पर हमले और संपत्ति को नुकसान के मामलों की भी जांच

समिति की जांच केवल प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हुई कथित कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगी। प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों और अन्य सुरक्षा बलों पर हमले, दोनों पक्षों की ओर से हुई हिंसा तथा सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोपों की भी जांच की जाएगी।

जांच के दायरे में भीड़ नियंत्रण के दौरान बल प्रयोग, निषेधाज्ञाओं की वैधता, पुलिस निगरानी और असहमति व्यक्त करने के अधिकार से जुड़े सवाल भी शामिल हैं। समिति उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर यह समझने का प्रयास करेगी कि घटनाओं के दौरान क्या हुआ और संबंधित पक्षों की जिम्मेदारी किस हद तक बनती है।

सुप्रीम कोर्ट ने गठित की थी 5 सदस्यीय समिति

सुप्रीम कोर्ट ने 18 अगस्त 2026 को जुलाई में हुए छात्र प्रदर्शनों के दौरान हिंसा के आरोपों की स्वतंत्र जांच के लिए 5 सदस्यीय समिति गठित की थी। समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति आर. सुभाष रेड्डी कर रहे हैं।

समिति में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रवि शंकर झा, दिल्ली हाई कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति शालिंदर कौर, सीबीआई के पूर्व निदेशक ऋषि कुमार शुक्ला और मेघालय के पूर्व पुलिस महानिदेशक एल. आर. बिश्नोई भी शामिल हैं।

समिति अब शिकायतों, गवाहों के बयानों और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर जांच आगे बढ़ाएगी। पोर्टल शुरू होने से प्रभावित लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों को अपनी बात रखने का माध्यम मिला है। जांच के अंतिम निष्कर्ष साक्ष्यों और संबंधित पक्षों के बयानों के परीक्षण के बाद ही सामने आएंगे।

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