मोरवा के कचरा प्लांट में प्लास्टिक खाते दिखीं सैकड़ों गायें, 78 वाहनों के भुगतान पर भी सवाल
पार्षदों ने वित्तीय अनियमितताओं की आशंका जताकर नगर निगम से लेकर आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ तक की शिकायत, जांच की स्थिति स्पष्ट करने की मांग

सिंगरौली। शहर की कचरा परिवहन व्यवस्था का संचालन करने वाली सीटाडेल आईएफएमएसडब्ल्यूएम प्राइवेट लिमिटेड कंपनी एक बार फिर सवालों के घेरे में है। मोरवा स्थित कंपनी के कचरा संग्रहण प्लांट में सैकड़ों गायों के प्लास्टिक खाते दिखाई देने से गौवंश की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। वहीं, नगर निगम में कचरा परिवहन के लिए उपयोग किए जाने वाले 78 वाहनों के भौतिक सत्यापन और उनसे संबंधित भुगतान को लेकर भी पार्षदों ने सवाल उठाए हैं। पार्षदों ने वित्तीय अनियमितताओं की आशंका जताते हुए विभिन्न अधिकारियों से शिकायत कर मामले की जांच कराने की मांग की है।
कचरा प्लांट में गौवंश की सुरक्षा पर सवाल
मोरवा स्थित संग्रहण प्लांट में गायों के प्लास्टिक खाने का मामला कचरा प्रबंधन की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है। प्लास्टिक का सेवन पशुओं के स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है। ऐसे में यह जांच जरूरी है कि प्लांट परिसर में कचरे के संग्रहण और पृथक्करण की व्यवस्था कैसी है तथा गौवंश को कचरे तक पहुंचने से रोकने के लिए क्या इंतजाम किए गए हैं।
यदि परिसर में बड़ी संख्या में गायें प्लास्टिक खा रही हैं, तो संबंधित अधिकारियों को मौके का निरीक्षण कर स्थिति की जांच करनी चाहिए। हालांकि, प्लांट की व्यवस्थाओं में वास्तविक कमियों और गौवंश के स्वास्थ्य पर पड़े प्रभाव की पुष्टि विभागीय निरीक्षण के बाद ही हो सकेगी।
78 वाहनों के सत्यापन और भुगतान का मामला
कंपनी के कामकाज को लेकर दूसरा सवाल नगर निगम में कचरा परिवहन के लिए उपयोग किए जाने वाले 78 वाहनों के भौतिक सत्यापन और भुगतान से जुड़ा है। पार्षदों ने वाहनों की सूची, दस्तावेजों और सत्यापन प्रक्रिया की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि वाहनों के नंबर, बीमा, फिटनेस, परमिट और अन्य जरूरी दस्तावेजों का मिलान वास्तविक स्थिति से कराया जाना चाहिए।
शिकायत पत्रों में उल्लेख किया गया है कि 22 मई 2025 को नगर निगम मुख्यालय के सामने सुबह करीब 3 बजे वाहनों का भौतिक सत्यापन कराया गया था। पार्षदों ने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए सत्यापन से संबंधित अभिलेखों की जांच की मांग की है।
शिकायतों में जनवरी 2023 से अप्रैल 2025 के बीच किए गए भुगतान का भी उल्लेख है। पार्षदों ने आशंका जताई है कि वाहन सूची, वास्तविक कार्य और भुगतान के दस्तावेजों का मिलान कराने पर पूरी स्थिति सामने आ सकती है। हालांकि, वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
नगर निगम से आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ तक पहुंची शिकायत
उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, पार्षद प्रेम सागर मिश्रा ने मई 2025 में नगर निगम अधिकारियों को पत्र लिखकर वाहनों के भौतिक सत्यापन और दस्तावेजों की जांच कराने की मांग की थी। इसके बाद 28 मई को नगर निगम आयुक्त और 10 जून को पुलिस अधीक्षक सिंगरौली तथा रीवा संभाग के आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ को संबोधित शिकायतों में भी जांच और नियमानुसार कार्रवाई का अनुरोध किया गया। 16 जून 2025 को आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ मुख्यालय, भोपाल को शिकायत भेजे जाने का भी उल्लेख है।
शिकायत पत्रों पर कई पार्षदों के हस्ताक्षर और मुहर होने की बात कही गई है। पार्षदों का आरोप है कि बार-बार शिकायत किए जाने के बावजूद जांच और कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट नहीं हुई है। ऐसे में संबंधित विभागों से शिकायतों पर हुई कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग उठ रही है।
सफाई व्यवस्था और सार्वजनिक धन की जवाबदेही जरूरी
नगर निगम की कचरा परिवहन व्यवस्था का उद्देश्य शहर को स्वच्छ रखना और कचरे का उचित निस्तारण करना है। ऐसे में संग्रहण प्लांट में गौवंश की सुरक्षा सुनिश्चित करना और कचरा परिवहन पर खर्च होने वाली राशि का पारदर्शी हिसाब रखना जरूरी है।
अब नगर निगम प्रशासन से प्लांट की व्यवस्था का निरीक्षण कराने, गौवंश को प्लास्टिक से बचाने के उपाय सुनिश्चित करने और 78 वाहनों के दस्तावेजों तथा भुगतान संबंधी अभिलेखों की जांच कराने की अपेक्षा की जा रही है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ से भी शिकायतों की वर्तमान स्थिति स्पष्ट करने की मांग उठ रही है।
फिलहाल प्रमुख सवाल यही हैं कि शिकायतों पर अब तक क्या कार्रवाई हुई, प्लांट में गौवंश की सुरक्षा के लिए कौन जिम्मेदार है और 78 वाहनों के सत्यापन तथा भुगतान से जुड़े आरोपों की जांच कब पूरी होगी। संबंधित अधिकारियों और कंपनी का पक्ष सामने आने पर मामले की स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।













