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विंध्यनगर-शक्तिनगर मार्ग पर आवारा मवेशियों का जमावड़ा: एनटीपीसी प्रबंधन और समितियों की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

सिंगरौली:विंध्यनगर-शक्तिनगर-तेलगवां मार्ग पर आवारा मवेशियों का भारी जमावड़ा आम नागरिकों और वाहन चालकों के लिए बड़ी मुसीबत बन गया है। इस मार्ग पर एक तरफ भारी राखड़ वाहनों की तेज आवाजाही होती है, तो वहीं दूसरी ओर स्ट्रीट लाइटें बंद रहने से रात के अंधेरे में सड़क पर बैठे मवेशी जानलेवा हादसों का कारण बन रहे हैं।

जानकारी के अनुसार, सड़कों से आवारा मवेशियों को हटाने और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर व्यवस्थित करने का जिम्मा एनटीपीसी द्वारा गठित समितियों को सौंपा गया है। इसके बावजूद सड़कों पर मवेशियों के जमे रहने से इन समितियों की कार्यप्रणाली और जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कार्य आवंटन में पारदर्शिता का अभाव है और जमीनी स्तर पर कोई प्रभावी निगरानी नहीं हो रही है। लोग पूछ रहे हैं कि जब संसाधन और जिम्मेदारी तय है, तो काम क्यों नहीं हो रहा?
जनता सवाल उठा रही है कि एनटीपीसी प्रबंधन ने किन समितियों को यह काम सौंपा है और क्या शर्तों के अनुसार काम की समीक्षा की जा रही है? लापरवाही पाए जाने पर अब तक क्या कार्रवाई हुई है? अंधेरी सड़कों और भारी वाहनों के बीच बेजुबान पशुओं और आम नागरिकों की जान जोखिम में है।

जिले की कमान हाल ही में नवागत कलेक्टर अंकित अस्थाना ने संभाली है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या वे इस गंभीर मामले का संज्ञान लेंगे? आम नागरिकों की मांग है कि एनटीपीसी प्रबंधन तुरंत समितियों के काम की जांच कराए, मवेशियों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाए और बंद स्ट्रीट लाइटों को तत्काल दुरुस्त कराए, ताकि किसी बड़े हादसे को टाला जा सके।

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