तेंदूडोल स्कूल को लेकर विस्थापितों का विरोध, सीबीएसई स्तर की शिक्षा की मांग
सरस्वती स्कूल के संचालन पर जताई आपत्ति, टीएचडीसी कार्यालय पहुंचकर सौंपा मांग पत्र; 619 परिवारों के पुनर्वास से जुड़ा है मामला

सिंगरौली। जिले के तेंदूडोल स्थित अमिलिया कोल माइंस परियोजना की पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन (आरएंडआर) कॉलोनी में स्कूल के संचालन को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। विस्थापित परिवारों और स्थानीय लोगों ने सरस्वती स्कूल के संचालन की प्रक्रिया पर आपत्ति जताते हुए बच्चों के लिए सीबीएसई स्तर की शिक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराने की मांग की है। विरोध कर रहे लोगों का आरोप है कि स्कूल संचालन को लेकर उन्हें और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को विश्वास में नहीं लिया गया।

स्थानीय लोगों ने स्कूल परिसर के बाहर लगाए गए सरस्वती स्कूल के बैनर और पोस्टर हटा दिए। इसके बाद सरपंच छोटे सिंह मरावी सहित कई लोग टीएचडीसी अमिलिया पिडरवाह कार्यालय पहुंचे और कंपनी प्रतिनिधि को मांग पत्र सौंपा। विस्थापितों ने स्पष्ट किया कि क्षेत्र के बच्चों को बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं मिलनी चाहिए और स्कूल के संचालन को लेकर उनकी राय को भी महत्व दिया जाना चाहिए।
डीपीएस और डीएवी जैसी शिक्षा व्यवस्था की मांग
विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि पुनर्वास कॉलोनी में ऐसा स्कूल होना चाहिए, जहां बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ सीबीएसई पाठ्यक्रम के अनुसार पढ़ाई की सुविधा मिले। उन्होंने डीपीएस, डीएवी, डीपाल और सेंट जोसेफ जैसे विद्यालयों के स्तर की शिक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराने की मांग रखी है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, प्रस्तावित स्कूल से केवल तेंदूडोल ही नहीं, बल्कि आसपास के गांवों के बच्चे भी लाभान्वित हो सकते हैं।
सरपंच छोटे सिंह मरावी ने कहा कि क्षेत्र के बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए बेहतर शिक्षा की व्यवस्था की जानी चाहिए। उन्होंने मांग की कि यहां सीबीएसई स्तर का स्कूल खोला जाए। स्थानीय लोगों ने यह भी कहा कि उनकी सहमति और चर्चा के बिना सरस्वती स्कूल का संचालन स्वीकार नहीं किया जाएगा।
619 परिवारों के पुनर्वास से जुड़ा है मामला
दरअसल, यह विवाद अमिलिया कोल माइंस परियोजना से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास से जुड़ा है। टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड के उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, सिंगरौली के पचौर गांव में लगभग 53.13 हेक्टेयर सरकारी भूमि पर आरएंडआर कॉलोनी विकसित की जा रही है। परियोजना के तहत सड़क, नाली, बिजली और पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं के साथ स्कूल, अस्पताल, आंगनवाड़ी और सामुदायिक केंद्र जैसी सुविधाओं का भी उल्लेख किया गया है।
कंपनी की वित्तीय वर्ष 2024-25 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, अमिलिया कोल माइंस परियोजना में 619 परिवारों को पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन संबंधी लाभों के लिए पात्र बताया गया है। ऐसे में पुनर्वास कॉलोनी में शिक्षा व्यवस्था का मुद्दा प्रभावित परिवारों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कंपनी प्रतिनिधि ने बयान देने से किया इनकार
मांग पत्र सौंपने के दौरान छोटे सिंह मरावी, बृजेश कुमार तिवारी, सूरज पटेल सहित अन्य लोग मौजूद रहे। स्थानीय लोगों ने पुनर्वास के साथ शिक्षा और दूसरी मूलभूत सुविधाओं से संबंधित अपनी मांगें कंपनी के सामने रखीं।
मामले में कंपनी प्रतिनिधि वितलेश नागर से स्कूल विवाद और सौंपे गए मांग पत्र के संबंध में प्रतिक्रिया मांगी गई, लेकिन उन्होंने बयान देने से इनकार कर दिया। उनका कहना था कि वह इस विषय पर प्रतिक्रिया देने के लिए अधिकृत नहीं हैं।
फिलहाल स्कूल के संचालन को लेकर विस्थापितों की आपत्ति सामने आई है, जबकि कंपनी की ओर से इस विवाद पर आधिकारिक पक्ष नहीं आया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि स्कूल के प्रबंधन, पाठ्यक्रम और शैक्षणिक सुविधाओं को लेकर कंपनी तथा प्रशासन क्या निर्णय लेते हैं और विस्थापित परिवारों की मांगों पर किस तरह समाधान निकाला जाता है।













