एसआईआर पर चुनाव आयोग का सुप्रीम कोर्ट में जवाब, कहा- तीनों आदेश सर्वसम्मति से लिए गए
फॉर्म-6 में बदलाव के आरोपों को किया खारिज, मुख्य चुनाव आयुक्त पर एकतरफा फैसले लेने के आरोपों का भी दिया जवाब

नई दिल्ली। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि इस प्रक्रिया से जुड़े सभी प्रमुख फैसले आयोग के तीनों सदस्यों की सर्वसम्मति से लिए गए थे। आयोग ने अपने जवाबी हलफनामे में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर एकतरफा निर्णय लेने के आरोपों को खारिज किया है। साथ ही कहा है कि एसआईआर से संबंधित आदेशों के जरिए मतदाता पंजीकरण के लिए निर्धारित फॉर्म-6 में कोई संशोधन नहीं किया गया।
तीनों आदेशों को सर्वसम्मति से मंजूरी का दावा
चुनाव आयोग के अनुसार, एसआईआर से संबंधित 24 जून 2025, 27 अक्टूबर 2025 और 14 मई 2026 को जारी किए गए तीनों आदेश आयोग के तीनों सदस्यों की सहमति से पारित हुए थे। आयोग ने यह भी कहा कि जवाबी हलफनामे को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी ने सर्वसम्मति से मंजूरी दी है।आयोग ने स्पष्ट किया कि किसी फाइल पर विचार के दौरान किसी चुनाव आयुक्त की ओर से दर्ज टिप्पणी, सवाल या सुझाव को अपने आप आयोग का अंतिम निर्णय नहीं माना जा सकता। उसके मुताबिक, फाइल पर विचार और औपचारिक निर्णय लेने की प्रक्रिया अलग-अलग हैं।
फाइलों की मंजूरी और कार्य आवंटन पर सफाई
आयोग ने बताया कि सामान्य प्रक्रिया में फाइल पहले एक चुनाव आयुक्त, फिर दूसरे चुनाव आयुक्त और उसके बाद मुख्य चुनाव आयुक्त के पास जाती है। जरूरी मामलों में इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से मंजूरी ली जा सकती है और बाद में उसे संबंधित फाइल में दर्ज किया जाता है।28 जुलाई 2026 को जारी कार्य आवंटन आदेश के संबंध में आयोग ने कहा कि यह आदेश प्रतिनियुक्ति पर आए एक अतिरिक्त सचिव ने जारी किया था। आयोग के मुताबिक, दोनों चुनाव आयुक्तों ने अगले दिन कैबिनेट सचिव को पत्र लिखा और 30 जुलाई को दोनों के संयुक्त निर्देश के बाद उस आदेश को लागू नहीं किया गया। आयोग ने यह भी कहा कि अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर आदेश जारी करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
फॉर्म-6 में बदलाव से किया इनकार
एसआईआर प्रक्रिया के दौरान नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 में कथित बदलाव को लेकर भी विवाद उठा था। चुनाव आयोग ने इस आरोप को खारिज करते हुए कहा कि निर्धारित फॉर्म में कोई संशोधन नहीं किया गया है। आयोग के अनुसार, एसआईआर के तहत इस्तेमाल किया जाने वाला घोषणा-पत्र अलग दस्तावेज है, जिसका उद्देश्य आवेदकों के विवरण का पुराने मतदाता रिकॉर्ड से मिलान करने में मदद करना है।आयोग ने याचिकाकर्ताओं के आरोपों को गलत बताते हुए याचिकाएं खारिज करने की मांग की है।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई पर नजर
एसआईआर की प्रक्रिया और चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर दायर याचिकाओं में आयोग के निर्णय लेने के तरीके पर सवाल उठाए गए हैं। चुनाव आयोग ने अपने हलफनामे में इन आरोपों का जवाब देते हुए प्रक्रिया को संवैधानिक और वैधानिक प्रावधानों के अनुरूप बताया है।फिलहाल, आयोग का पक्ष हलफनामे के रूप में अदालत के सामने है। मामले में याचिकाकर्ताओं की दलीलों और सुप्रीम कोर्ट के रुख से आगे की कानूनी स्थिति स्पष्ट होगी।













