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पचौर में THDC और बंधा कोल ब्लॉक के वाहनों का चक्का जाम, अधिकारियों से सीधे बातचीत पर अड़े ग्रामीण

 

सिंगरौली। बरगवां थाना क्षेत्र के पचौर गांव में THDC अमिलिया कोल माइंस और बंधा कोल ब्लॉक कंपनी के खिलाफ ग्रामीणों का आक्रोश सामने आया। अपनी लंबित मांगों और कंपनी प्रबंधन की कथित अनदेखी से नाराज ग्रामीणों ने दोनों कंपनियों के वाहनों को रोककर चक्का जाम कर दिया। रोके गए वाहनों में तेल टैंकर, विस्फोटक सामग्री ले जाने वाले वाहन और गिट्टी लोड वाहन भी शामिल थे। सूचना मिलने पर बरगवां पुलिस और कंपनी के कुछ अधिकारी मौके पर पहुंचे, लेकिन ग्रामीण अपनी मांगों पर अड़े रहे।
ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने कंपनियों को अपनी जमीन, जल और जंगल दिया, लेकिन अब स्थानीय युवाओं को रोजगार देने के बजाय बाहर के लोगों को प्राथमिकता दी जा रही है। उनका कहना है कि स्थानीय बेरोजगारों को सिक्योरिटी गार्ड तक की नौकरी नहीं मिल रही है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कंपनी के अधिकारियों से मिलने जाने पर उन्हें सुरक्षा गार्डों के माध्यम से बाहर करवा दिया जाता है।

दीपेश भाटिया और संजीव मित्तल से बातचीत की मांग
मौके पर पहुंचे कंपनी के कुछ अधिकारियों से ग्रामीणों ने बातचीत करने से इनकार करते हुए कहा कि वे जिम्मेदार अधिकारी नहीं हैं। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि वे THDC के अधिकारी संजीव मित्तल और बंधा कोल ब्लॉक के अधिकारी दीपेश भाटिया से ही बात करेंगे। उनका कहना है कि जब तक जिम्मेदार अधिकारी मौके पर आकर समस्याओं का समाधान नहीं करेंगे, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

ग्रामीणों ने गांव की क्षतिग्रस्त सड़क की तत्काल मरम्मत, स्थानीय बेरोजगार युवाओं को रोजगार देने और पचौर सहित आसपास के करीब आधा दर्जन गांवों में बंधा कोल ब्लॉक के लिए अधिग्रहित जमीन पर बने मकानों का मुआवजा उचित मूल्यांकन के साथ देने की मांग उठाई है। इसके अलावा गांव में स्ट्रीट लाइट लगाने और कंपनी के भारी वाहनों के लिए गांव के भीतर से गुजरने के बजाय वैकल्पिक रास्ता तैयार करने की मांग भी की गई है।

अमिलिया कोल माइंस के मुख्य द्वार पर 9वें दिन भी धरना

इधर, THDC अमिलिया कोल माइंस के पीड़रवाह-बोदरा मुख्य द्वार पर ग्रामीणों का धरना लगातार 9वें दिन भी जारी है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अब तक कंपनी प्रबंधन का कोई जिम्मेदार अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा और न ही उनकी समस्याओं का कोई ठोस निराकरण किया गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार आवेदन देने के बावजूद उनकी मांगों पर सुनवाई नहीं हुई। इसी वजह से आंदोलन और चक्का जाम का रास्ता अपनाना पड़ा। फिलहाल पचौर में ग्रामीणों का विरोध जारी है और वे जिम्मेदार अधिकारियों से सीधे बातचीत तथा मांगों पर ठोस कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

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