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ललितपुर-सिंगरौली रेल परियोजना: भू-अर्जन विवाद पर कुर्सा में प्रशासनिक चौपाल, मुआवजे के बाद ही टूटिंगे मकान

देवसर (सिंगरौली)। ललितपुर-सिंगरौली रेल परियोजना से प्रभावित भू-अर्जन मामलों के समाधान के लिए रविवार को कुर्सा गांव में विशेष प्रशासनिक चौपाल लगाई गई। इसमें देवसर एसडीएम सौरभ मिश्रा, चितरंगी एसडीएम देवेंद्र द्विवेदी, तहसीलदार प्रदीप सिंह और रेलवे के अधिकारी शामिल हुए। चौपाल में बड़ी संख्या में प्रभावित ग्रामीणों ने हिस्सा लिया।

चौपाल में पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष अजय कुमार पाठक ने ग्रामीणों की ओर से भू-अर्जन प्रक्रिया में हुई विसंगतियों को रखा। उन्होंने कहा कि भूमि अधिग्रहण में शुरू से ही अनियमितताएं रही हैं। 27 अक्टूबर 2020 को कलेक्टर द्वारा भूमि के क्रय-विक्रय पर रोक लगाने के बाद कई रजिस्टर्ड जमीनों को सह-खाते में दर्ज किया गया, जो गलत है। उन्होंने आरोप लगाया कि धारा 12 के मूल्यांकन में केवल जमीन को शामिल किया गया और मकान व अन्य परिसंपत्तियों को छोड़ दिया गया। इसके बाद रेलवे की आपत्ति पर पुनः जांच और कलेक्टर द्वारा सुनवाई के निर्देश भी दिए गए, लेकिन विसंगतियां दूर नहीं हुईं।

ग्रामीणों की शिकायतें सुनने के बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने आश्वस्त किया कि सभी मामलों को कलेक्टर के संज्ञान में लाया जाएगा। प्रशासन ने साफ किया कि प्रभावितों को पूरा मुआवजा मिलने के बाद ही ध्वस्तीकरण (तोड़फोड़) की कार्रवाई की जाएगी। जिन मामलों में मुआवजा अधूरा है या मामला न्यायालय में विचाराधीन है, वहां अंतिम फैसला आने तक कोई कार्रवाई नहीं होगी। ग्रामीणों ने भी मांग की है कि नियमों के तहत सही प्रतिकर का भुगतान पहले सुनिश्चित किया जाए। इस चौपाल से वर्षों से लंबित इस विवाद के सुलझने की उम्मीद जगी है।

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