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एआई क्रांति पर जलवायु संकट की छाया: दुनिया के हजारों डेटा सेंटर बढ़ते खतरे की जद में

 

नई दिल्ली। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की वैश्विक दौड़ तेज होती जा रही है। दुनिया की बड़ी टेक कंपनियां अरबों डॉलर का निवेश कर रही हैं और सरकारें डिजिटल अर्थव्यवस्था को भविष्य की विकास धुरी मान रही हैं। लेकिन इसी बीच एक नई चिंता सामने आई है। जलवायु जोखिम विश्लेषण संस्था एक्सडीआई (XDI) की ताजा रिपोर्ट ने चेतावनी दी है कि दुनिया भर में बन रहे हजारों डेटा सेंटर बढ़ते जलवायु संकट के कारण गंभीर जोखिम का सामना कर सकते हैं।

रिपोर्ट में दुनिया के 2,595 प्रस्तावित डेटा सेंटरों का अध्ययन किया गया। इसमें पाया गया कि बड़ी संख्या में ये केंद्र ऐसे क्षेत्रों में विकसित किए जा रहे हैं, जहां भविष्य में अत्यधिक गर्मी, बाढ़, जंगल की आग और अन्य चरम मौसमीय घटनाओं का खतरा लगातार बढ़ सकता है।

डेटा सेंटर क्यों हैं महत्वपूर्ण?

डेटा सेंटर आधुनिक डिजिटल दुनिया की रीढ़ हैं। ऑनलाइन बैंकिंग, क्लाउड स्टोरेज, वीडियो स्ट्रीमिंग, सोशल मीडिया और एआई आधारित सेवाएं इन्हीं पर निर्भर हैं। इंटरनेट भले ही आभासी दुनिया लगे, लेकिन उसकी पूरी संरचना विशाल सर्वरों, बिजली आपूर्ति प्रणालियों और शीतलन उपकरणों पर टिकी हुई है।

सबसे बड़ा खतरा बढ़ती गर्मी

रिपोर्ट के अनुसार डेटा सेंटर उद्योग के लिए सबसे बड़ा जोखिम अत्यधिक तापमान है। हजारों सर्वर लगातार संचालित होने के कारण उन्हें ठंडा रखना अनिवार्य होता है। तापमान बढ़ने पर कूलिंग सिस्टम पर दबाव बढ़ता है, ऊर्जा खपत बढ़ती है और संचालन लागत में भारी इजाफा होता है। कई मामलों में उपकरणों की कार्यक्षमता भी प्रभावित हो सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में “हीट स्ट्रेस” डेटा सेंटर उद्योग के लिए सबसे तेजी से बढ़ने वाली चुनौतियों में शामिल होगा।

केवल बाढ़ या तूफान ही नहीं, अप्रत्यक्ष खतरे भी गंभीर

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि कई बार डेटा सेंटरों को सीधा नुकसान नहीं होता, बल्कि बिजली आपूर्ति बाधित होने, दूरसंचार नेटवर्क ठप पड़ने, पानी की कमी या सप्लाई चेन प्रभावित होने से संचालन संकट में पड़ सकता है। भविष्य में ऐसे अप्रत्यक्ष जोखिम प्रत्यक्ष भौतिक क्षति से भी अधिक गंभीर साबित हो सकते हैं।

अमेरिका और यूरोप के कई क्षेत्र जोखिम में

रिपोर्ट में अमेरिका, फ्रांस, दक्षिण कोरिया सहित कुछ क्षेत्रों को अपेक्षाकृत अधिक जलवायु जोखिम वाले स्थानों के रूप में चिन्हित किया गया है। इन इलाकों में बढ़ती गर्मी और चरम मौसमीय घटनाएं आने वाले वर्षों में निवेशकों और नीति निर्माताओं के लिए चुनौती बन सकती हैं।

भारत को भी रहना होगा सतर्क

हालांकि रिपोर्ट में भारत को प्रमुख जोखिम हॉटस्पॉट नहीं बताया गया है, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि तेजी से बढ़ते भारतीय डेटा सेंटर बाजार को भी सावधानी बरतनी होगी। मुंबई, चेन्नई, हैदराबाद, पुणे और नोएडा जैसे शहरों में बड़े पैमाने पर डेटा सेंटर विकसित हो रहे हैं। दूसरी ओर देश लगातार अधिक तीव्र गर्मी की लहरों का सामना कर रहा है।

ऐसे में ऊर्जा दक्षता, आधुनिक कूलिंग तकनीक और जलवायु-अनुकूल बुनियादी ढांचे की आवश्यकता पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।

एआई का भविष्य सिर्फ तकनीक पर नहीं, बुनियादी ढांचे पर भी निर्भर

एक्सडीआई के संस्थापक और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी प्रमुख डॉ. कार्ल मैलन का कहना है कि एआई अवसंरचना निर्माण की वैश्विक दौड़ अभूतपूर्व गति से आगे बढ़ रही है। यदि डेटा सेंटरों के लिए सही स्थानों का चयन किया जाए और जलवायु जोखिमों को ध्यान में रखकर डिजाइन तैयार किए जाएं, तो संभावित नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

रिपोर्ट का निष्कर्ष स्पष्ट है कि एआई का भविष्य केवल शक्तिशाली प्रोसेसर और उन्नत एल्गोरिदम से तय नहीं होगा, बल्कि इस बात से भी निर्धारित होगा कि डेटा सेंटर बदलती जलवायु परिस्थितियों का सामना कितनी मजबूती से कर पाते हैं।

दुनिया जहां एआई क्रांति का उत्सव मना रही है, वहीं यह रिपोर्ट चेतावनी देती है कि यदि जलवायु जोखिमों को नजरअंदाज किया गया तो भविष्य की डिजिटल अर्थव्यवस्था के सामने सबसे बड़ी चुनौती किसी नई तकनीक से नहीं, बल्कि बदलते मौसम और उसके प्रभावों से होगी।

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