40 घंटे का मध्यस्थता प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूर्ण कर लौटे सिंगरौली के अधिवक्ता

सिंगरौली। जिला सिंगरौली के अधिवक्ता तेजिंदर सिंह एवं हरमीत सिंह ने 40 घंटे का मध्यस्थता प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलतापूर्वक पूर्ण कर मध्यस्थता प्रशिक्षण प्रमाण-पत्र प्राप्त किया है। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम न्यायालयों में वैकल्पिक विवाद समाधान को बढ़ावा देने तथा अधिवक्ताओं को मध्यस्थता की व्यावहारिक एवं तकनीकी जानकारी प्रदान करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था।
प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ सुमन श्रीवास्तव, सदस्य सचिव, मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जबलपुर द्वारा किया गया। कार्यक्रम की प्रभारी शक्ति वर्मा, सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, जबलपुर थी।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के प्रशिक्षक नीरज उपाध्याय एवं नीना खरे ने अपने व्यापक अनुभव एवं विशेषज्ञता के आधार पर प्रतिभागियों का मार्गदर्शन किया। दोनों प्रशिक्षकों ने मध्यस्थता की बारीकियों, निष्पक्षता, प्रभावी संवाद एवं विवादों के सौहार्दपूर्ण समाधान की तकनीकों को सरल एवं व्यावहारिक ढंग से समझाया, जिसकी प्रतिभागियों ने सराहना की।40 घंटे के इस गहन प्रशिक्षण में प्रतिभागियों को मध्यस्थता की अवधारणा, संवाद कौशल, सक्रिय श्रवण ,वार्ता एवं समझौता तकनीक, विवाद प्रबंधन, मध्यस्थ की भूमिका, गोपनीयता, नैतिकता तथा समझौता पत्र तैयार करने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर प्रशिक्षण प्रदान किया गया। प्रशिक्षण के दौरान रोल-प्ले, समूह चर्चा, व्यावहारिक अभ्यास एवं केस स्टडी के माध्यम से प्रतिभागियों को वास्तविक परिस्थितियों में मध्यस्थता की प्रक्रिया से अवगत कराया गया।
इस अवसर पर अधिवक्ता तेजिंदर सिंह ने कहा कि प्रशिक्षण से मध्यस्थता प्रक्रिया की गहन समझ विकसित हुई है तथा भविष्य में यह ज्ञान न्यायिक एवं सामाजिक स्तर पर विवादों के सौहार्दपूर्ण समाधान में सहायक सिद्ध होगा।वहीं अधिवक्ता हरमीत सिंह ने कहा कि यह प्रशिक्षण उनके लिए अत्यंत ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायक रहा। प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन और व्यावहारिक सत्रों ने मध्यस्थता के प्रति उनका दृष्टिकोण और अधिक सुदृढ़ किया है।
प्रशिक्षण पूर्ण होने के पश्चात अधिवक्ताओं ने अतुल कुमार खंडेलवाल, प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, सिंगरौली से सौजन्य भेंट कर प्रशिक्षण के अनुभव साझा किए। इस दौरान न्यायिक व्यवस्था में मध्यस्थता की बढ़ती भूमिका तथा विवादों के त्वरित एवं सौहार्दपूर्ण निपटारे में इसकी उपयोगिता पर चर्चा की गई।
दोनों अधिवक्ताओं ने प्रशिक्षण के सफल आयोजन हेतु मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, प्रशिक्षकों एवं सभी प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि वे भविष्य में मध्यस्थता को बढ़ावा देने तथा समाज में विवादों के शांतिपूर्ण समाधान की संस्कृति को सशक्त बनाने के लिए सक्रिय रूप से कार्य करेंगे।













