स्वामी आर्यवेश ने डॉ. विनोद कुमार शर्मा को आर्य युवक परिषद (ट्राइसिटी) का अध्यक्ष, अशोक आर्य को महासचिव नियुक्त किया

मनोज शर्मा,चंडीगढ़। वैदिक संस्कृति, महर्षि दयानंद सरस्वती के आदर्शों तथा आर्य समाज की विचारधारा के व्यापक प्रचार-प्रसार को नई गति देने के उद्देश्य से सार्वदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा, दिल्ली के प्रधान, प्रख्यात वैदिक चिंतक, लेखक एवं ‘राजधर्म’ तथा ‘वैदिक सार्वदेशिक’ पत्रिका के संपादक स्वामी आर्यवेश जी ने आर्य युवक परिषद (ट्राइसिटी—चंडीगढ़, पंचकूला एवं मोहाली) के गठन की घोषणा करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार एवं शिक्षाविद् डॉ. विनोद कुमार शर्मा को परिषद का अध्यक्ष तथा समर्पित समाजसेवी अशोक आर्य को महासचिव नियुक्त किया। यह नियुक्ति आर्य समाज सेक्टर-22, चंडीगढ़ में आयोजित श्रावणी उपाकर्म एवं वैदिक समारोह के अवसर पर की गई। इस अवसर पर स्वामी आर्यवेश जी ने कहा कि परिषद का उद्देश्य ट्राइसिटी के युवाओं में वैदिक संस्कार, राष्ट्रभक्ति, नैतिक मूल्यों और चरित्र निर्माण की भावना को सुदृढ़ करना है।
परिषद सभी आर्य समाजों के सहयोग से युवाओं को वैदिक जीवन-दर्शन से जोड़ने के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित करेगी। डॉ. विनोद कुमार शर्मा पिछले 22 वर्षों से आर्य समाज की गतिविधियों से सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं। वे महर्षि दयानंद सरस्वती की वैदिक विचारधारा के प्रचार-प्रसार में साहित्य के माध्यम से निरंतर योगदान दे रहे हैं। वे अब तक 28 काव्य-संग्रहों की रचना कर चुके हैं, जिनमें ‘गीता काव्य’ तथा ‘कठोपनिषद’ विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। इसके अतिरिक्त उन्होंने ऋग्वेद एवं अथर्ववेद पर आधारित काव्य-रचनाएँ भी तैयार की हैं, जो प्रकाशनाधीन हैं। नवनियुक्त महासचिव अशोक आर्य लंबे समय से आर्य समाज की गतिविधियों, वैदिक धर्म के प्रचार तथा सामाजिक जागरूकता के कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। उनकी संगठन क्षमता और समाज सेवा को देखते हुए उन्हें यह महत्वपूर्ण दायित्व सौंपा गया है। नियुक्ति के उपरांत डॉ. विनोद कुमार शर्मा एवं अशोक आर्य ने स्वामी आर्यवेश जी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वे उनके मार्गदर्शन में वेदों के प्रचार-प्रसार, महर्षि दयानंद सरस्वती के क्रांतिकारी विचारों तथा आर्य समाज की जनकल्याणकारी गतिविधियों को जन-जन तक पहुँचाने के लिए पूर्ण समर्पण के साथ कार्य करेंगे। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि वैदिक मूल्यों के प्रसार से समाज में नैतिकता, संस्कार, सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय चेतना को नई मजबूती मिलेगी।
इस अवसर पर डॉ. विनोद शर्मा ने कहा कि वे वेदों के प्रचार-प्रसार के लिए सदैव तत्पर रहेंगे तथा महर्षि दयानंद सरस्वती के विचारों को जन-जन तक पहुँचाने के लिए आर्य समाज के साथ मिलकर सक्रिय भूमिका निभाएंगे। उन्होंने युवाओं से वैदिक संस्कृति को अपनाने और राष्ट्र निर्माण में अपनी सकारात्मक भागीदारी सुनिश्चित करने का आह्वान किया।











