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एएमएमए में नेतृत्व संकट गहराया, महिला नेतृत्व वाली कार्यकारिणी के सामूहिक इस्तीफे से बढ़ी चिंता

 

कोच्चि। मलयालम फिल्म कलाकारों के संगठन एएमएमए (एसोसिएशन ऑफ मलयालम मूवी आर्टिस्ट्स) में नेतृत्व संकट लगातार गहराता जा रहा है। अध्यक्ष श्वेता मेनन के नेतृत्व वाली कार्यकारिणी के सामूहिक इस्तीफे के बाद संगठन के भीतर मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। इस घटनाक्रम पर फिल्म जगत की ओर से मिश्रित प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं।

वरिष्ठ अभिनेत्री मल्लिका सुकुमारन ने कहा कि निवर्तमान कार्यकारिणी से कुछ गलतियां भले हुई हों, लेकिन संगठन को ऐसे नेतृत्व की आवश्यकता है जो उद्योग की वास्तविक समस्याओं को समझे और सदस्यों की चिंताओं का समाधान कर सके। उन्होंने श्वेता मेनन के समर्थन में संगठन की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने की घोषणा की। अभिनेत्री लक्ष्मीप्रिया ने भी सदस्यता छोड़ते हुए आरोप लगाया कि आमसभा में कुछ सदस्य पूर्व निर्धारित एजेंडा लेकर पहुंचे थे और बैठक का माहौल जानबूझकर टकरावपूर्ण बनाया गया।

अभिनेता जगदीश ने कहा कि आमसभा में श्वेता मेनन पर कोई व्यक्तिगत हमला नहीं किया गया, हालांकि उनके कार्यकाल से जुड़े कई मुद्दों पर सवाल उठाए गए थे। वहीं अभिनेता भीमन रेघु ने दावा किया कि अध्यक्ष के रूप में उनकी कार्यशैली के कारण कई सदस्य संगठन से दूर हो गए थे। अभिनेता बाबूराज ने संगठन में सामूहिक निर्णयों और सभी पक्षों की बात सुनने वाले नेतृत्व की आवश्यकता पर जोर दिया। अनूप चंद्रन ने मौजूदा संकट को अनुभव की कमी का परिणाम बताते हुए कहा कि कार्यकारिणी भंग किए बिना भी स्थिति संभाली जा सकती थी।

उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष अगस्त में हुए चुनावों में श्वेता मेनन और महासचिव कुकू परमेश्वरन के नेतृत्व वाली टीम को बड़ी उम्मीदों के साथ चुना गया था। पहली बार संगठन के शीर्ष पदों पर महिलाओं का नेतृत्व स्थापित हुआ था, जिसे एएमएमए के इतिहास में महत्वपूर्ण बदलाव माना गया था। हालांकि एक वर्ष के भीतर ही नेतृत्व संकट और सामूहिक इस्तीफों ने इन उम्मीदों को झटका दिया है।

केरल सरकार ने फिलहाल इसे संगठन का आंतरिक मामला बताया है। राज्य के सांस्कृतिक मामलों एवं सिनेमा मंत्री पी.सी. विष्णुनाध ने कहा कि सरकार को इसमें हस्तक्षेप करने की आवश्यकता नहीं है और उम्मीद जताई कि सदस्य आपसी संवाद के माध्यम से समाधान निकालेंगे।

अब एएमएमए के सामने संगठन में विश्वास बहाल करने, आंतरिक मतभेद दूर करने और निष्पक्ष तरीके से नए नेतृत्व के चुनाव की प्रक्रिया पूरी करने की बड़ी चुनौती है। मलयालम फिल्म उद्योग की निगाहें फिलहाल अंतरिम समिति पर टिकी हैं, जो आने वाले समय में संगठन की दिशा और भविष्य तय करेगी।

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