सिंगरौली के विकास में रामलल्लू बैस की भूमिका फिर चर्चा में, क्या एक बार फिर मिल सकता है मौका?
विधानसभा की शोध-पत्रिका में पूर्व विधायक रामलल्लू बैस के विकास कार्यों का उल्लेख, शिक्षा, स्वास्थ्य और रेल कनेक्टिविटी को लेकर किए गए प्रयासों की चर्चा

सिंगरौली। ऊर्जा और औद्योगिक क्षेत्र के रूप में देशभर में पहचान बना चुके सिंगरौली के विकास की यात्रा में पूर्व विधायक रामलल्लू बैस के कार्यों का एक बार फिर उल्लेख सामने आया है। मध्यप्रदेश विधानसभा की शोध-पत्रिका में प्रकाशित सामग्री में उनके कार्यकाल के दौरान सिंगरौली के विकास से जुड़ी विभिन्न पहल और प्रयासों को रेखांकित किया गया है। इसके बाद राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में यह चर्चा भी शुरू हो गई है कि क्या सिंगरौली के विकास के लिए रामलल्लू बैस को एक बार फिर मौका मिलना चाहिए।
विधानसभा की शोध-पत्रिका के अनुसार, लंबे समय से सिंगरौली को जिला बनाने की मांग उठती रही थी। विभिन्न स्तरों पर प्रयासों के बाद 24 मई 2008 को सिंगरौली को जिले का दर्जा मिला। इसके बाद शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली, सिंचाई, पेयजल और परिवहन के क्षेत्र में विकास का विस्तार हुआ।
प्रकाशित सामग्री में मेडिकल कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज, माइनिंग कॉलेज, हवाई पट्टी, कन्या महाविद्यालय, हाईस्कूल, हायर सेकेंडरी स्कूल, शासकीय लॉ कॉलेज और कृषि विज्ञान केंद्र जैसी संस्थाओं के विकास का उल्लेख किया गया है। कृषि विज्ञान केंद्र के लिए 53 एकड़ भूमि तथा लॉ कॉलेज भवन के लिए 12 एकड़ भूमि उपलब्ध कराने का भी जिक्र है।
रेल कनेक्टिविटी को लेकर भी सिंगरौली से भोपाल और दिल्ली तक संपर्क तथा सिंगरौली-जबलपुर इंटरसिटी एक्सप्रेस जैसी सुविधाओं का उल्लेख शोध-पत्रिका में किया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं और हर घर नल जल योजना के माध्यम से पेयजल पहुंचाने के प्रयास भी इसमें शामिल हैं।
ऐसे में सिंगरौली के विकास की पिछली यात्रा को देखते हुए यह सवाल राजनीतिक चर्चा का विषय बन रहा है कि यदि रामलल्लू बैस को भविष्य में फिर से जिम्मेदारी का अवसर मिलता है, तो क्या वे अपने अनुभव के आधार पर सिंगरौली के विकास को नई दिशा दे पाएंगे। फिलहाल इतना तय है कि उनके पुराने कार्यों का विधानसभा की शोध-पत्रिका में उल्लेख एक बार फिर उनकी राजनीतिक भूमिका और विकास कार्यों को चर्चा के केंद्र में ले आया है।













