वन स्टॉप सेंटर की संवेदनशील काउंसलिंग से फिर जुड़ा बिखरता परिवार
रीवा में प्रभावी मध्यस्थता से दंपती ने भुलाए मतभेद, साथ रहने का लिया संकल्प

भोपाल : समय पर हस्तक्षेप, संवेदनशील काउंसलिंग और सकारात्मक मध्यस्थता किसी टूटते परिवार को फिर से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। रीवा में महिला एवं बाल विकास विभाग के अंतर्गत संचालित वन स्टॉप सेंटर ने ऐसे ही एक प्रकरण में प्रभावी हस्तक्षेप करते हुए लंबे समय से तनावपूर्ण वैवाहिक जीवन से गुजर रहे दंपती के बीच संवाद स्थापित कराया। केंद्र के निरंतर प्रयासों के बाद पति-पत्नी ने अपने मतभेद दूर कर पुनः साथ रहने और शांतिपूर्ण वैवाहिक जीवन व्यतीत करने का निर्णय लिया।
मामला मऊगंज जिले के हनुमाना थाना क्षेत्र के ग्राम महरी निवासी रंजना साहू और उनके पति सुनील साहू से संबंधित है। दोनों का विवाह 13 दिसंबर 2021 को हिंदू रीति-रिवाजों से हुआ था। विवाह के शुरुआती महीनों में पारिवारिक जीवन सामान्य रहा, लेकिन बाद में आवेदिका ने ससुराल पक्ष द्वारा दहेज के लिए वाहन की मांग तथा पति द्वारा नशे की स्थिति में मारपीट और मानसिक प्रताड़ना किए जाने की शिकायत वन स्टॉप सेंटर, रीवा में दर्ज कराई। लगातार बढ़ते विवादों के कारण दंपती का वैवाहिक जीवन टूटने की कगार पर पहुंच गया था।
शिकायत प्राप्त होने के बाद वन स्टॉप सेंटर ने मामले को गंभीरता से लेते हुए दोनों पक्षों से संपर्क किया और काउंसलिंग के लिए बुलाया। प्रारंभिक निर्धारित तिथि 9 जून को अनावेदक के उपस्थित नहीं होने के बावजूद केंद्र ने प्रयास जारी रखे। लगातार संपर्क और फॉलोअप के बाद 16 जून को पति सुनील साहू केंद्र में उपस्थित हुए। इसके बाद दोनों पक्षों की समस्याओं को समझते हुए संवेदनशीलता के साथ काउंसलिंग और मध्यस्थता की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।
वन स्टॉप सेंटर रीवा की प्रभारी प्रशासक सुश्री श्रुति मिश्रा, परामर्शदाता सुश्री सलमा खान, प्रधान आरक्षक सुश्री रंजना तिवारी तथा केस वर्करों ने दोनों पक्षों से संवाद कर उन्हें वैवाहिक जीवन में आपसी सम्मान, विश्वास और संवाद के महत्व को समझाया। काउंसलिंग के दौरान पति को नशे और हिंसात्मक व्यवहार के दुष्परिणामों से अवगत कराते हुए भविष्य में किसी भी प्रकार की मारपीट अथवा मानसिक प्रताड़ना नहीं करने के लिए प्रेरित किया गया। साथ ही परिवार की एकता, सामाजिक जिम्मेदारी और बच्चों के सुरक्षित भविष्य के महत्व पर भी चर्चा की गई।
लगातार संवाद और सकारात्मक मध्यस्थता का परिणाम 18 जून को सामने आया, जब दोनों पक्षों के बीच आपसी सहमति से समझौता हुआ। पति-पत्नी ने पूर्व की कटु परिस्थितियों को पीछे छोड़ते हुए पुनः साथ रहने और एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान करते हुए शांतिपूर्ण वैवाहिक जीवन जीने का संकल्प लिया। पति द्वारा भविष्य में किसी भी प्रकार की मारपीट अथवा मानसिक प्रताड़ना नहीं करने का लिखित एवं मौखिक आश्वासन भी दिया गया।
केंद्र द्वारा प्रकरण की स्थिति पर नजर बनाए रखने के लिए दंपती को 20 जुलाई 2026 को फॉलोअप के लिए पुनः उपस्थित होने के निर्देश दिए गए। दोनों पक्षों ने वन स्टॉप सेंटर द्वारा उपलब्ध कराए गए परामर्श और सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।
यह प्रकरण इस बात का प्रभावी उदाहरण है कि समय पर किया गया संवेदनशील हस्तक्षेप, सकारात्मक संवाद और प्रभावी काउंसलिंग परिवारों को टूटने से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। वन स्टॉप सेंटर, रीवा द्वारा महिलाओं को संकट की स्थिति में आवश्यक सहायता, संरक्षण और परामर्श उपलब्ध कराने के साथ-साथ आपसी संवाद के माध्यम से पारिवारिक विवादों के समाधान की दिशा में भी उल्लेखनीय प्रयास किए जा रहे हैं। इस पहल से न केवल एक परिवार को पुनः साथ आने का अवसर मिला, बल्कि बच्चों के सुरक्षित भविष्य और परिवार में विश्वास, सम्मान एवं सौहार्द की पुनर्स्थापना की राह भी बनी। वन स्टॉप सेंटर की यह पहल ‘सहायता से समाधान और संवाद से परिवार’ की भावना को साकार करते हुए संवेदनशील सामाजिक दायित्व का प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत करती है।












