अमेरिका-ईरान तनाव का बाजार पर असर, सेंसेक्स 700 अंक से ज्यादा टूटा, निफ्टी भी 250 अंक लुढ़का
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और वैश्विक बाजारों में कमजोरी से निवेशकों में बढ़ी चिंता

नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर बुधवार को भारतीय शेयर बाजार पर दिखाई दिया। कारोबार शुरू होते ही बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली। बंबई शेयर बाजार का सेंसेक्स 700 अंक से ज्यादा टूट गया, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी 250 अंक से अधिक नीचे आ गया। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और एशियाई बाजारों में कमजोरी से निवेशकों की चिंता और बढ़ गई।
सेंसेक्स मंगलवार के 76,944 अंक के बंद स्तर के मुकाबले बुधवार को 76,471 अंक पर खुला। शुरुआती कारोबार में यह फिसलकर 76,135 अंक तक पहुंच गया। वहीं निफ्टी 24,055 अंक के पिछले बंद स्तर की तुलना में 23,858 अंक पर खुला और शुरुआती कारोबार में 23,786 अंक तक नीचे आ गया।
कई शेयरों में भारी बिकवाली
बाजार में गिरावट के बीच कई प्रमुख शेयरों में दबाव देखने को मिला। बड़ी कंपनियों के शेयरों में इंडिगो और इटरनल कमजोर रहे। मध्यम श्रेणी की कंपनियों में जीवीटीएंडडी, गोदरेज प्रॉपर्टीज, एमएफएसएल, टीआई इंडिया और वोल्टास में गिरावट दर्ज की गई। छोटी कंपनियों के शेयरों में भी केफिन टेक, ब्रिगेड और चोला होल्डिंग्स लाल निशान में कारोबार करते नजर आए।
होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ी चिंता
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के होर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिकी नियंत्रण से जुड़े दावे और ईरान के खिलाफ जारी सैन्य कार्रवाई ने वैश्विक बाजारों की चिंता बढ़ा दी है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के प्रमुख तेल आपूर्ति मार्गों में शामिल है। यहां किसी भी तरह का व्यवधान होने पर कच्चे तेल की वैश्विक आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका है।
कच्चा तेल 95 डॉलर के करीब
अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ने के साथ कच्चे तेल की कीमतों में भी तेजी आई। बुधवार को ब्रेंट कच्चा तेल करीब 95 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से देश के आयात बिल और महंगाई पर दबाव बढ़ने की आशंका रहती है। इसका असर निवेशकों के रुख पर भी पड़ता है।
एशियाई बाजारों में भी गिरावट
अमेरिका-ईरान तनाव का असर भारतीय बाजार के साथ अन्य एशियाई बाजारों पर भी पड़ा। जापान का निक्केई करीब 2.9 प्रतिशत और दक्षिण कोरिया का कोस्पी करीब 4 प्रतिशत तक फिसल गया। वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितता के बीच निवेशकों में जोखिम को लेकर चिंता बढ़ी हुई है।













