ग्रैप-1 लागू, फिर भी नोएडा की सड़कों पर उड़ रही धूल, प्रदूषण नियंत्रण के दावों पर सवाल
निर्माण कार्यों और सड़कों पर जमा मिट्टी से बढ़ रही परेशानी, निगरानी के दावों के बीच जमीनी स्तर पर प्रभावी कार्रवाई की जरूरत

नोएडा। दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रैप) का पहला चरण लागू होने के बावजूद नोएडा की सड़कों पर धूल उड़ने की समस्या बनी हुई है। शहर के कई हिस्सों में वाहनों की आवाजाही के दौरान उड़ती धूल और लगातार जारी निर्माण कार्यों से वायु गुणवत्ता पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है। ऐसे में प्रदूषण नियंत्रण के लिए किए जा रहे प्रयासों और निगरानी व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल उठने लगे हैं।
उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) की ओर से प्रदूषण की निगरानी के लिए कई टीमें तैनात किए जाने का दावा किया जा रहा है। इन टीमों को प्रदूषण फैलाने वाले कारकों की पहचान करने और संबंधित स्थानों पर जरूरी कार्रवाई सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी गई है। हालांकि, सड़कों पर उड़ती धूल की समस्या यह संकेत देती है कि धूल नियंत्रण के उपायों को जमीनी स्तर पर और प्रभावी बनाने की जरूरत है।
निर्माण कार्य और सड़क पर जमा मिट्टी बन रही परेशानी
नोएडा में विभिन्न स्थानों पर विकास और निर्माण कार्य जारी हैं। निर्माण स्थलों पर मिट्टी, रेत, सीमेंट और अन्य सामग्री का उचित प्रबंधन नहीं होने से धूल हवा में फैल सकती है। इसके अलावा निर्माण सामग्री से लदे वाहनों की आवाजाही और सड़कों पर जमा मिट्टी भी प्रदूषण बढ़ाने वाले कारकों में शामिल हैं।
वाहनों के गुजरने पर सड़क पर जमा धूल हवा में फैलती है, जिससे आसपास रहने वाले लोगों और राहगीरों को परेशानी हो सकती है। धूल के लगातार संपर्क से स्वास्थ्य संबंधी जोखिम भी बढ़ सकते हैं। ऐसे में निर्माण स्थलों और धूल प्रभावित सड़कों पर नियमित सफाई तथा प्रभावी नियंत्रण उपाय जरूरी हैं।
पानी का छिड़काव और निर्माण सामग्री ढकना जरूरी
धूल पर नियंत्रण के लिए सड़कों की नियमित सफाई, जरूरत के अनुसार पानी का छिड़काव, निर्माण सामग्री को ढककर रखना और मलबे का उचित निस्तारण जैसे उपाय प्रभावी ढंग से लागू किए जाने चाहिए। निर्माण स्थलों के आसपास जमा मिट्टी और मलबे को समय पर हटाना भी जरूरी है।
यदि इन उपायों का पालन नहीं होता है, तो प्रदूषण नियंत्रण के लिए लागू दिशा-निर्देशों का अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाएगा। संबंधित एजेंसियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि निर्माण कार्यों के दौरान धूल न फैले और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
हॉटस्पॉट चिह्नित करने के साथ कार्रवाई भी जरूरी
शहर में प्रदूषण बढ़ाने वाले हॉटस्पॉट की पहचान कर वहां रोकथाम के प्रयास किए जा रहे हैं। लेकिन केवल संवेदनशील स्थानों को चिह्नित करना पर्याप्त नहीं है। इन क्षेत्रों में नियमित निरीक्षण, सड़क सफाई, धूल नियंत्रण और निर्माण गतिविधियों की जांच लगातार होनी चाहिए।
यूपीपीसीबी, नोएडा प्राधिकरण और अन्य संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय भी आवश्यक है। निगरानी के दौरान यदि कहीं नियमों का उल्लंघन मिलता है, तो संबंधित एजेंसी को समयबद्ध कार्रवाई करनी चाहिए और जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
ग्रैप-1 लागू होने के बाद नोएडा में धूल की समस्या पर प्रभावी नियंत्रण के लिए अब निगरानी के साथ ठोस कार्रवाई पर जोर देने की जरूरत है। प्रदूषण से राहत तभी संभव है, जब निर्माण स्थलों से लेकर सड़कों तक धूल रोकने के उपाय नियमित रूप से लागू हों और उनकी प्रभावशीलता की लगातार समीक्षा की जाए।













