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अजंता राधा परियोजना में स्थानीय विस्थापितों को 2 महीने से इंतजार, बाहरी लोगों की नियुक्ति पर उठे सवाल

रोजगार के लिए फॉर्म भरवाने के बाद चक्कर कटवाने का आरोप, वीटीसी और मेडिकल जांच के बिना काम कराने के दावों पर प्रबंधन से जवाब की मांग

सिंगरौली। जिले की अजंता राधा परियोजना में स्थानीय विस्थापितों को रोजगार देने की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि रोजगार के लिए स्थानीय प्रभावितों से फॉर्म भरवाने के बावजूद उन्हें 2 महीने से अधिक समय से इंतजार कराया जा रहा है। वहीं, दूसरी ओर बाहरी लोगों को काम पर रखे जाने के आरोप भी सामने आए हैं।

शिकायतों के अनुसार, स्थानीय विस्थापित परिवार रोजगार की उम्मीद में आवश्यक दस्तावेज जमा कराकर नियुक्ति प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार कर रहे हैं। आरोप यह भी है कि कुछ बाहरी लोगों से आवश्यक वोकेशनल ट्रेनिंग सर्टिफिकेट (वीटीसी) और मेडिकल जांच के बिना काम कराया जा रहा है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

इस मामले में सवाल उठ रहा है कि क्या परियोजना में स्थानीय प्रभावितों को रोजगार में प्राथमिकता दी जा रही है और सभी अभ्यर्थियों के लिए समान नियमों का पालन हो रहा है। यदि आवश्यक प्रशिक्षण या मेडिकल फिटनेस जांच के बिना काम कराया जा रहा है, तो यह श्रमिकों की सुरक्षा के लिहाज से गंभीर विषय हो सकता है।

स्थानीय प्रभावितों की मांग है कि परियोजना प्रबंधन भर्ती प्रक्रिया की स्थिति स्पष्ट करे, लंबित आवेदनों पर समयबद्ध निर्णय ले और नियुक्तियों से संबंधित नियमों की जानकारी सार्वजनिक करे। साथ ही, संबंधित विभागों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की जा रही है।

फिलहाल परियोजना प्रबंधन का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है। आरोपों की पुष्टि और वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए संबंधित दस्तावेजों तथा भर्ती प्रक्रिया की जांच आवश्यक है।

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