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लखनऊ में वकीलों के चैंबरों पर चला बुलडोजर, विरोध में धरने पर बैठे अधिवक्ता

245 चैंबरों को अवैध चिह्नित कर लगाए गए थे लाल निशान, वकीलों ने वैकल्पिक व्यवस्था की मांग की; मौके पर भारी पुलिस बल तैनात

लखनऊ, 25 अक्टूबर। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में वकीलों के चैंबरों को हटाने की कार्रवाई को लेकर हंगामा खड़ा हो गया। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ के आदेश के अनुपालन में नगर निगम की परिवर्तन टीम बुलडोजर और कर्मचारियों के साथ चैंबरों को ध्वस्त करने पहुंची, तो अधिवक्ताओं ने विरोध शुरू कर दिया। बड़ी संख्या में वकील मौके पर एकत्र होकर धरने पर बैठ गए। स्थिति को देखते हुए मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया।

नगर निगम प्रशासन के अनुसार, परिसर और आसपास कुल 245 चैंबरों को अवैध निर्माण की श्रेणी में चिह्नित किया गया था। इन पर लाल निशान लगाने के साथ नंबर दर्ज किए गए थे। संबंधित अधिवक्ताओं को नोटिस देकर निर्धारित समय में दस्तावेज प्रस्तुत करने या जगह खाली करने के लिए कहा गया था। प्रशासन का कहना है कि निर्धारित समय सीमा पूरी होने के बाद ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की गई।

15 से 20 साल से चैंबरों में बैठने का दावा

कार्रवाई का विरोध कर रहे अधिवक्ताओं का कहना है कि वे पिछले 15 से 20 वर्षों से इन चैंबरों में बैठकर वकालत कर रहे हैं और अपने मुवक्किलों के मुकदमों की पैरवी करते हैं। अचानक चैंबर हटाए जाने से उनकी आजीविका प्रभावित होगी और न्यायालय आने वाले वादकारियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

वकीलों ने कहा कि उनका विरोध अदालत के आदेश से नहीं, बल्कि वैकल्पिक व्यवस्था किए बिना चैंबर हटाने की कार्रवाई से है। उन्होंने मांग की कि अधिवक्ताओं के बैठने और मुवक्किलों से मिलने के लिए पहले उचित स्थान उपलब्ध कराया जाए।

वैकल्पिक व्यवस्था की मांग, प्रशासन से बातचीत

धरने पर बैठे अधिवक्ताओं ने नगर निगम और जिला प्रशासन से कार्रवाई स्थगित करने की मांग की। उनका कहना है कि जब तक बैठने के लिए दूसरी जगह निर्धारित नहीं होती, तब तक चैंबरों को हटाने की कार्रवाई रोक दी जानी चाहिए।

मौके पर तनाव को देखते हुए पुलिस बल तैनात रहा। प्रशासनिक अधिकारियों ने अधिवक्ताओं के प्रतिनिधियों से बातचीत कर विवाद सुलझाने का प्रयास किया। मामले में आगे की स्थिति प्रशासन और अधिवक्ताओं के बीच होने वाली बातचीत तथा संबंधित न्यायिक आदेशों के अनुपालन पर निर्भर करेगी।

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