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देवगांव पंचायत में ₹1.10 लाख की निर्माण सामग्री खरीदी पर सवाल, शुभम इंटरप्राइजेज के बिल की जांच की मांग

चितरंगी में हॉस्पिटल चौक स्थित फर्म के अस्तित्व और सीमेंट-गिट्टी की आपूर्ति पर उठे सवाल, ग्रामीणों ने कलेक्टर और जिला पंचायत सीईओ से जांच कर जिम्मेदारी तय करने की मांग की

सिंगरौली। जिले के चितरंगी क्षेत्र की ग्राम पंचायत देवगांव में निर्माण सामग्री की खरीदी से जुड़े ₹1.10 लाख के बिल को लेकर सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि पंचायत के विकास कार्यों के लिए शुभम इंटरप्राइजेज नामक फर्म से सीमेंट और गिट्टी की खरीदी दर्शाई गई, लेकिन स्थानीय स्तर पर इस नाम के प्रतिष्ठान की मौजूदगी को लेकर संदेह जताया जा रहा है। मामले में बिल, सामग्री की वास्तविक आपूर्ति और भुगतान से संबंधित अभिलेखों की जांच कराने की मांग उठ रही है। यदि आरोपों की पुष्टि होती है, तो पंचायत के वित्तीय लेन-देन और संबंधित जिम्मेदारों की भूमिका की पड़ताल जरूरी होगी।

उपलब्ध बताए जा रहे दस्तावेजों के अनुसार, शुभम इंटरप्राइजेज, हॉस्पिटल चौक, चितरंगी के नाम से 4 अगस्त 2026 को ₹1,10,000 का टैक्स इनवॉइस जारी किया गया। इसमें 200 बोरी सीमेंट की कीमत ₹70,000 और 40 एमएम गिट्टी की कीमत ₹40,000 दर्शाई गई है। अब इस बिल के आधार पर सवाल उठाया जा रहा है कि सामग्री की आपूर्ति वास्तव में हुई थी या नहीं और यदि हुई, तो उसका इस्तेमाल पंचायत के किस विकास कार्य में किया गया।

दुकान और सामग्री की आपूर्ति को लेकर सवाल

स्थानीय लोगों का दावा है कि हॉस्पिटल चौक पर शुभम इंटरप्राइजेज नाम की दुकान या गोदाम उन्हें दिखाई नहीं दिया। इसी आधार पर फर्म के वास्तविक अस्तित्व और उसकी आपूर्ति क्षमता की जांच की मांग की जा रही है। हालांकि, फर्म की स्थिति और बिल की वैधता की आधिकारिक पुष्टि अभी होना बाकी है।

इस मामले में प्रमुख सवाल यह है कि यदि 200 बोरी सीमेंट और गिट्टी पंचायत को उपलब्ध कराई गई थी, तो उसकी परिवहन संबंधी जानकारी, स्टॉक रजिस्टर में प्रविष्टि, सामग्री प्राप्ति की रसीद और संबंधित निर्माण कार्यों का रिकॉर्ड कहां है? क्या सामग्री के सत्यापन के बाद भुगतान किया गया? क्या पंचायत के पास खरीदी और उपयोग से जुड़े सभी आवश्यक दस्तावेज मौजूद हैं? इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे।

अन्य पंचायतों की खरीदी की भी जांच की मांग

स्थानीय स्तर पर यह आशंका भी जताई जा रही है कि चितरंगी क्षेत्र की दूसरी ग्राम पंचायतों में भी इसी प्रकार की खरीदी और बिलिंग की जांच की जरूरत हो सकती है। हालांकि, अन्य पंचायतों में अनियमितता होने के संबंध में फिलहाल कोई पुष्ट तथ्य सामने नहीं आया है। ऐसे में संबंधित फर्म के पंजीयन, जीएसटी रिकॉर्ड, बैंक लेन-देन और अन्य पंचायतों को की गई आपूर्ति की जांच से वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

कलेक्टर से जांच और कार्रवाई की अपेक्षा

मामले को लेकर ग्रामीणों और जागरूक नागरिकों ने कलेक्टर, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी तथा जनपद पंचायत चितरंगी के अधिकारियों से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। मांग है कि बिल जारी करने वाली फर्म के पंजीयन और वास्तविक व्यावसायिक गतिविधियों का सत्यापन किया जाए। साथ ही पंचायत के भुगतान अभिलेख, सामग्री प्राप्ति रजिस्टर, परिवहन दस्तावेज और संबंधित निर्माण कार्यों का भौतिक सत्यापन कराया जाए।

यदि जांच में फर्जी बिलिंग, सरकारी धन के दुरुपयोग या अन्य वित्तीय अनियमितताओं की पुष्टि होती है, तो संबंधित व्यक्तियों और जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए। ग्रामीणों ने दोषियों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज करने की मांग भी उठाई है।

फिलहाल इस मामले में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि सामने आना बाकी है। ऐसे में निष्पक्ष जांच, दस्तावेजों का सत्यापन और संबंधित पक्षों का जवाब सामने आना महत्वपूर्ण होगा। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस मामले में जांच शुरू कराकर खरीदी और भुगतान की वास्तविक स्थिति को सार्वजनिक करता है या नहीं।

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