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वोट चोरी’ के आरोप पर 1 नवंबर को दिल्ली में कांग्रेस की महारैली, राहुल गांधी ने लोगों से किया आह्वान

रामलीला मैदान में ‘वोट बचाओ–देश बचाओ’ जन मार्च का ऐलान, छात्र, किसान, मजदूर, महिलाओं और युवाओं से शामिल होने की अपील; रैली की तारीख पर व्यापारियों और 1984 दंगा पीड़ितों ने जताई आपत्ति

नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में प्रस्तावित कांग्रेस की महारैली में शामिल होने के लिए छात्रों, युवाओं, किसानों, मजदूरों, महिलाओं और व्यापारियों से अपील की है। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूचियों से नाम काटे जा रहे हैं और चुनावी प्रक्रिया में नियमों का उल्लंघन हो रहा है। कांग्रेस ने इस कार्यक्रम को ‘वोट बचाओ–देश बचाओ’ जन मार्च और महारैली नाम दिया है।

राहुल गांधी ने रविवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा कि वोट चोरी के आरोपों को चुपचाप स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि मतदाता सूचियों से नाम हटाए गए और सवाल उठाने वालों पर लाठियां चलाई गईं। उन्होंने लोगों से लोकतंत्र की रक्षा के लिए दिल्ली पहुंचने की अपील करते हुए कहा कि वोट का अधिकार नागरिकों का है और इसकी रक्षा की लड़ाई भी जनता की है।

भाजपा पर भी साधा निशाना

राहुल गांधी ने अपनी पोस्ट में भाजपा और उसके सहयोगियों पर भी निशाना साधा। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि वे कार्यक्रम का प्रचार कर रहे हैं और उम्मीद जताई कि अगले 7 दिनों तक भी उनका यही उत्साह बना रहेगा। कांग्रेस इस रैली के जरिए मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े अपने आरोपों को प्रमुखता से उठाने की तैयारी में है।

व्यापारियों ने रैली टालने की मांग की

रैली की तारीख को लेकर दिल्ली के व्यापारी वर्ग ने आपत्ति जताई है। व्यापारियों ने राहुल गांधी से त्योहारों के दौरान कार्यक्रम टालने की अपील की है। उनका कहना है कि नवंबर के पहले सप्ताह में धनतेरस और दीपावली की खरीदारी के कारण बाजारों में कारोबार बढ़ता है। व्यापारियों ने आशंका जताई है कि रैली के चलते यातायात प्रतिबंध और रास्तों में बदलाव होने से व्यापार प्रभावित हो सकता है। उन्होंने त्योहारों के दौरान संभावित आर्थिक नुकसान की भी चिंता जताई है।

1984 दंगा पीड़ितों ने भी जताया विरोध

1984 के सिख-विरोधी दंगों के पीड़ित परिवारों ने भी 1 नवंबर को रैली आयोजित किए जाने पर विरोध जताने की बात कही है। उनका कहना है कि यह तारीख उनके लिए बेहद संवेदनशील है, क्योंकि 1984 में इसी अवधि के दौरान दिल्ली सहित कई स्थानों पर सिख समुदाय के लोगों को निशाना बनाया गया था। पीड़ित परिवारों का मानना है कि इस दिन राजनीतिक आयोजन से उनकी भावनाएं आहत हो सकती हैं।

इस तरह, कांग्रेस की प्रस्तावित महारैली को लेकर जहां पार्टी मतदाता अधिकारों का मुद्दा उठाने की तैयारी कर रही है, वहीं आयोजन की तारीख और उससे जुड़ी व्यवस्थाओं को लेकर व्यापारियों तथा 1984 दंगा पीड़ितों की आपत्तियां भी सामने आई हैं।

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