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पश्चिम एशिया के संघर्ष पर ब्रिक्स की चिंता, इजरायल-फिलिस्तीन विवाद के समाधान के लिए दो राष्ट्र सिद्धांत का समर्थन

नई दिल्ली में 12वें संसदीय मंच की बैठक संपन्न, संयुक्त राष्ट्र में सुधार और आतंकवाद के खिलाफ साझा कार्रवाई पर भी जोर

नई दिल्ली, 28 अक्टूबर। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और संघर्ष पर चिंता जताते हुए ब्रिक्स देशों के संसदीय नेताओं ने इजरायल-फिलिस्तीन विवाद के शांतिपूर्ण समाधान के लिए दो राष्ट्र सिद्धांत का समर्थन किया है। नई दिल्ली में 26 और 27 अक्टूबर को आयोजित 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच की बैठक के समापन पर जारी संयुक्त घोषणा में फिलिस्तीनी जनता के आत्मनिर्णय, स्वतंत्रता और संप्रभु राष्ट्र के अधिकार को दोहराया गया। प्रतिनिधियों ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय विवादों के समाधान के लिए संवाद, सहयोग और शांतिपूर्ण कूटनीति को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के नेतृत्व में आयोजित इस बैठक में पश्चिम एशिया की स्थिति के अलावा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार, आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई, जलवायु परिवर्तन, डिजिटल संप्रभुता और वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में विकासशील देशों की भागीदारी जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।

दो राष्ट्र सिद्धांत से शांतिपूर्ण समाधान पर जोर

संयुक्त घोषणा में इजरायल और फिलिस्तीन के दो स्वतंत्र राष्ट्रों के शांतिपूर्ण तथा सुरक्षित सह-अस्तित्व की अवधारणा का समर्थन किया गया। इसमें फिलिस्तीनी लोगों के अपने भविष्य का निर्धारण करने और स्वतंत्र एवं संप्रभु राष्ट्र की स्थापना के अधिकार को रेखांकित किया गया।

ब्रिक्स संसदीय नेताओं ने पश्चिम एशिया में बढ़ती शत्रुता पर चिंता जताते हुए नागरिकों की सुरक्षा, संयम और बातचीत के जरिए विवादों के समाधान की आवश्यकता पर जोर दिया। घोषणा में एकतरफा दबावकारी उपायों और आर्थिक प्रतिबंधों को लेकर भी सवाल उठाए गए तथा अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप कार्रवाई की जरूरत बताई गई।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की मांग

बैठक में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण, लोकतांत्रिक और प्रभावी बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। प्रतिनिधियों ने कहा कि वैश्विक संस्थाओं में विकासशील देशों और ग्लोबल साउथ की भूमिका को मजबूत किया जाना चाहिए, ताकि अंतरराष्ट्रीय निर्णय प्रक्रिया में उनकी आवाज प्रभावी ढंग से शामिल हो सके।

संसदीय नेताओं ने अंतरराष्ट्रीय संसदीय मंचों पर आपसी सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता भी जताई। उनका मानना है कि वैश्विक चुनौतियों के समाधान में विकासशील देशों के साझा दृष्टिकोण को महत्व मिलना चाहिए।

आतंकवाद के खिलाफ साझा कार्रवाई पर जोर

संयुक्त घोषणा में आतंकवाद की निंदा करते हुए इसके वित्तपोषण, आतंकवादियों की आवाजाही और उन्हें सुरक्षित ठिकाने उपलब्ध कराने जैसी गतिविधियों के खिलाफ सहयोग बढ़ाने की जरूरत बताई गई। घोषणा में 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर में हुए आतंकवादी हमले की भी निंदा की गई, जिसमें 26 लोगों की जान गई थी।

प्रतिनिधियों ने आतंकवाद के खिलाफ दोहरे मानदंड समाप्त करने और संबंधित देशों के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान को मजबूत करने पर जोर दिया।

डिजिटल तकनीक और जलवायु परिवर्तन भी चर्चा के केंद्र में

बैठक में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे और डिजिटल संप्रभुता पर भी विचार-विमर्श हुआ। संयुक्त घोषणा में ब्रिक्स देशों के बीच डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना से संबंधित जानकारी साझा करने के लिए साझा संग्रह विकसित करने का प्रस्ताव रखा गया। साथ ही व्यक्तिगत जानकारी की गोपनीयता और सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता बताई गई।

जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर प्रतिनिधियों ने उत्सर्जन कम करने, इसके प्रभावों से निपटने की क्षमता बढ़ाने और सतत विकास लक्ष्यों को लागू करने पर जोर दिया। विकासशील देशों के लिए जलवायु अनुकूलन, तकनीक और आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता को भी महत्वपूर्ण माना गया।

ओम बिरला ने संवाद और सहयोग को बताया जरूरी

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि वैश्विक चुनौतियों के स्थायी समाधान युद्ध के बजाय संवाद, संघर्ष के बजाय शांति और प्रतिस्पर्धा के बजाय सहयोग से तलाशे जाने चाहिए। उन्होंने राष्ट्रीय संप्रभुता के सम्मान, विवादों के शांतिपूर्ण समाधान और विकास के समान अवसरों पर आधारित वैश्विक व्यवस्था की आवश्यकता बताई।

बैठक का मुख्य विषय लोगों-केंद्रित विकास के लिए संसदों को सशक्त बनाना था। इसमें सदस्य और साझेदार देशों के संसदीय प्रतिनिधियों ने भाग लिया। भारत की 2026 की ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान आयोजित इस मंच के समापन पर ओम बिरला ने 2027 के लिए अध्यक्षता चीन को सौंपी।

संयुक्त घोषणा में अंतरराष्ट्रीय शांति, आतंकवाद के खिलाफ सहयोग, संयुक्त राष्ट्र में सुधार और तकनीकी एवं पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता रेखांकित की गई।

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