प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमनाथ स्वाभिमान पर्व पर दिया ऐतिहासिक संबोधन, कहा – “सोमनाथ का इतिहास विजय और पुनर्निमाण का है”

सोमनाथ, गुजरात: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के अवसर पर दुनियाभर के श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं दीं और कहा कि यह पर्व केवल एक हजार साल पहले हुए मंदिर विध्वंस के स्मरण का नहीं है, बल्कि यह भारत के अस्तित्व, अभिमान और विजय का पर्व है। इस विशेष अवसर पर, प्रधानमंत्री ने सोमनाथ मंदिर के इतिहास और इसके पुनर्निर्माण के महत्व को विस्तार से बताया।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा, “आज एक सुखद संयोग है कि हम सोमनाथ मंदिर की स्वाभिमान यात्रा के एक हजार साल पूरे होने का जश्न मना रहे हैं, साथ ही 1951 में इसके पुनर्निर्माण के 75 साल भी पूरे हो रहे हैं।” उन्होंने आगे कहा कि सोमनाथ का इतिहास विनाश और पराजय का नहीं बल्कि विजय और पुनर्निर्माण का है, जो हमारे पूर्वजों के पराक्रम, त्याग और बलिदान का प्रतीक है।
सोमनाथ मंदिर का ऐतिहासिक महत्व
प्रधानमंत्री ने कहा कि सोमनाथ मंदिर का इतिहास पूरी दुनिया के इतिहास में एक अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत करता है। उन्होंने यह भी बताया कि जब गजनी से लेकर औरंगजेब तक तमाम आक्रांता सोमनाथ पर हमला करने आए, तो उन्होंने यह सोचकर हमला किया था कि वे इस मंदिर को नष्ट कर देंगे, लेकिन वे यह नहीं समझ पाए कि सोमनाथ की आध्यात्मिक शक्ति और सदाशिव महादेव की शक्ति का कोई मुकाबला नहीं कर सकता।
उन्होंने कहा, “आक्रांता सोचते थे कि वे तलवार से सोमनाथ को नष्ट कर देंगे, लेकिन वे भूल गए कि इस मंदिर के नाम में ही ‘सोम’ (अमृत) जुड़ा हुआ है, जो हलाहल को पीकर भी अमर रहने का प्रतीक है। यह मंदिर चैतन्य शक्ति का प्रतीक है, जो न केवल कल्याणकारी है बल्कि प्रचंड तांडव शिव की शक्ति का भी स्रोत है।”
ऐतिहासिक संघर्ष और पुनर्निर्माण
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “एक हजार साल पहले इस स्थान पर हमारे पूर्वजों ने जान की बाजी लगाकर सोमनाथ की रक्षा की। उन्होंने अपनी आस्था और विश्वास के लिए अपनी जान दी। आक्रांता सोचते थे कि उन्होंने हमें जीत लिया, लेकिन आज एक हजार साल बाद भी सोमनाथ महादेव के मंदिर पर फहराती ध्वजा पूरी सृष्टि को यह बता रही है कि हिंदुस्तान की शक्ति क्या है।”
उन्होंने कहा कि मजबूत और निरंतरता के प्रतीक इस मंदिर ने हर युग में खुद को फिर से स्थापित किया और ध्वस्त करने की मंशा रखने वाले आक्रांताओं का इतिहास अब केवल कुछ पन्नों तक सीमित रह गया है। वहीं, सोमनाथ मंदिर अब धर्मध्वजा को थामे खड़ा है और भारत की शक्ति और संस्कार को दुनिया में फैलाता है।
मृत्युंजय की महिमा
प्रधानमंत्री ने सोमनाथ में विराजमान महादेव के “मृत्युंजय” रूप का भी जिक्र किया, जो मृत्यु को भी जीतने की शक्ति रखते हैं। उन्होंने कहा, “सोमनाथ का इतिहास विनाश और पराजय का नहीं, बल्कि विजय और पुनर्निर्माण का है। यह सोमनाथ की यात्रा की सच्चाई है, जो भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक शक्ति का प्रतीक है।”













