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देवसर तहसील के बाबू नही खाली कर रहे सरकारी आवास स्थानांतरण के बाद भी

नहीं खाली किया सरकारी कमरा, सरकारी आवास में वर्षो से बंद है ताला, मरम्मत न होने से मकान हो रहे जर्जर
पोल खोल सिंगरौली
पद से हटने या फिर स्थानांतरण होने के बाद सरकार के बड़े ओहदे पर बैठे अधिकारी व कर्मचारी आवास खाली नही करते हैं, जिससे उस आवास का लाभ अन्य जरुरत मंद अधिकारियों या फिर कर्मचारियों मिल सके। लेकिन देवसर तहसील एवं एसडीएम कार्यालय के कर्मचारी एवं बाबू का हाल इसके विपरित है। यहां से वर्षो पहले स्थानांतरण के होने के बाद भी वे आवास को खाली नहीं किये हैं।
जबकि उन मकानों का वे उपयोग नहीं कर रहे। महज ताला बंद कर उस पर कब्जा जमाये हुये हैं। इसे उनकी लापरवाही माने या फिर हेकड़ी। उनकी इस करतूत से अव्यवस्था का आलम है। जरुरत मंद अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिये वह मकान उपलब्ध नहीं हो पा रहा हैं।
देवसर तहसील में पदस्थ रहे राजस्व निरीक्षक बलजीत रावत वर्तमान में सेवानिवृत्त हो चुके हैं। इनके नाम से पीडब्लयू डीआर 41बी मकान आवंटित है। सेवानिवत्त होने के बाद भी इन्होंने आवास को खाली नहीं किया है। अभी भी आवास में निवास कर रहे हैं। जबकि इन्हें आवास खाली कर देना चाहिये।
इसी प्रकार देवसर एसडीएम कार्यालय के भू-अर्जन शाखा में तत्कालीन रीडर भालचन्द्र डेहरिया को पीडब्लूडीआर 35 आवास आवंटित हैं। इनका यहां से स्थानांतरण हो चुका है। स्थानांतरण के साथ ही इन्हें आवास खाली नही कर रहे हैं। वही एसडीएम कार्यालय में पदस्थ रीडर पंकज चौधरी की भी मनमानी कम नहीं हैं।
इन्होंने भी बलजीत एवं भालचन्द्र की तरह ही वर्षो से सरकारी आवास में कब्जा जमाये हुये हैं। तहसील के पास ही स्थित पीडब्ल्यूडी के मकान में इन्होंने कब्जा जमाये हुये हैं। आवास में ताला बंद किये हुये हैं। न तो आवास का उपयोग कर रहे हंै और ना ही उसे खाली कर रहे हैं।
साथ ही तहसील एवं एसडीएम कार्यालय सहित अन्य विभागों में वर्तमान में कई अधिकारी एवं कर्मचारी ऐसे हैं, जिन्हें वास्तव में सरकारी आवास की जरुरत है, लेकिन उन्हें सरकारी आवास नहीं मिल पा रहा है। मजबूरी में वे अन्य निजी मकानों को किराये पर लेकर रह रहे हैं। जहां उन्हें कई तरह की असुविधाओं का सामना करना पड़ता है। प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारी इस ओर ध्यान नही दे रहे हंै।













