देवसर के मरीजों की भोपाल में बदहाली: इलाज के नाम पर ‘अव्यवस्था’ की मार, नमक-रोटी पर गुजारे को मजबूर

सिंगरौली। सिंगरौली जिले के देवसर विधानसभा क्षेत्र से बड़े अरमानों और बेहतर इलाज की उम्मीद लेकर भोपाल भेजे गए सैकड़ों मरीज आज सिस्टम की बेरुखी और अस्पतालों की अव्यवस्था के बीच आंसू बहाने को मजबूर हैं। सरई में आयोजित ‘मेगा मेडिकल कैंप’ के बाद जिन मरीजों को एल.एन. मेडिकल कॉलेज और जेके हॉस्पिटल (भोपाल) रेफर किया गया था, वहां से आ रही तस्वीरें और वीडियो विचलित करने वाले हैं।
अस्पतालों में इलाज सुस्त, परिजनों की हालत पस्त
मरीजों और उनके साथ आए परिजनों ने गंभीर आरोप लगाए हैं कि निजी अस्पतालों में इलाज की प्रक्रिया चींटी की चाल से चल रही है। कई-कई घंटों तक डॉक्टर राउंड पर नहीं आते, जिससे गंभीर मरीजों की जान पर बन आई है। अस्पताल स्टाफ के व्यवहार को लेकर भी मरीजों में भारी आक्रोश है।
भोजन का संकट: नमक-रोटी खाकर काट रहे दिन
सबसे हृदयविदारक स्थिति भोजन और आवास को लेकर सामने आई है। दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों से आए ये गरीब परिवार संसाधनों के अभाव में अस्पताल के बाहर या रैनबसेरों में ‘नमक-रोटी’ खाकर दिन गुजार रहे हैं। जेके हॉस्पिटल से वायरल हुए कुछ वीडियो में मरीजों ने रोते हुए अपनी व्यथा साझा की है, जिसमें बुनियादी सुविधाओं की कमी और इलाज में हो रही देरी को साफ देखा जा सकता है।
मरीजों और परिजनों की प्रमुख मांगें:
बढ़ते आक्रोश के बीच मरीजों ने प्रशासन के सामने निम्नलिखित मांगें रखी हैं:
त्वरित उपचार: सभी रेफर मरीजों का तत्काल और समुचित विशेषज्ञ इलाज शुरू किया जाए।
बुनियादी सुविधाएं: मरीजों के परिजनों के लिए गरिमामय भोजन और ठहरने की व्यवस्था प्रशासन सुनिश्चित करे।
प्रबंधन पर कार्रवाई: लापरवाही बरतने वाले अस्पताल प्रबंधन की जांच हो और दोषियों को दंडित किया जाए।
आर्थिक सहायता: घर से दूर फंसे गरीब परिवारों को तत्काल आर्थिक संबल प्रदान किया जाए।
जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों में उबाल
मामला सामने आने के बाद देवसर क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने शासन-प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि मेगा कैंप के नाम पर वाहवाही लूटने वाली सरकार को इन गरीबों की जान की परवाह भी करनी चाहिए।
प्रशासनिक सुस्ती पर सवाल:
अब सबकी निगाहें सिंगरौली जिला प्रशासन और प्रदेश सरकार पर टिकी हैं। क्या इन मरीजों को समय पर इलाज और सम्मान मिलेगा या इन्हें इसी तरह ‘नमक-रोटी’ और अव्यवस्था के भरोसे छोड़ दिया जाएगा? यदि जल्द ही कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो यह मामला बड़े जनांदोलन का रूप ले सकता है।













