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रेणु नदी में अवैध खनन का खेल जारी, अधिकारी बने मूकदर्शक

एनजीटी के आदेशों व वन विभाग की एनओसी के विपरीत चल रहा खनन कार्य, प्रतिबंधित मशीनों के जरिए नदी के गर्भ से निकाली जा रही छान की बालू

सोनभद्र। ओबरा तहसील क्षेत्र के खेवंधा बालू साइड की आड़ में रेणु नदी से अवैध खनन का बड़ा खेल धड़ल्ले से जारी है। हैरानी की बात यह है कि प्रशासनिक अधिकारियों की नाक के नीचे प्रतिबंधित मशीनों से बालू का खनन निरंतर दिन-रात कराया जा रहा है, लेकिन जिम्मेदार विभाग के अधिकारी मूकदर्शक बने हुए हैं।

जानकारी के अनुसार रेणु नदी में एसके बायो फर्म के नाम से अराजी संख्या 246 में बालू खनन के लिए पट्टा आवंटित है। भरोसेमंद सूत्रों ने बताया कि अवैध कमाई के चक्कर में पट्टा धारक के इशारे पर प्रतिबंधित मशीनों से नदी के गर्भ से बालू की निकासी करायी जा रही है। आलम यह है कि रात के अंधेरे से लेकर दिनदहाड़े तक प्रतिबंधित मशीनों से नदी का सीना चीरकर बालू की निकाली जा रही है, जबकि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) द्वारा नदी में मशीनों के प्रयोग पर सख्त रोक लगाई गई है, इसके बावजूद नियमों को ताक पर रखकर खनन माफिया खुलेआम पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस अवैध खनन से नदी का स्वरूप बिगड़ रहा है और जलस्तर पर भी गंभीर असर पड़ रहा है। साथ ही राजस्व को भी भारी नुकसान हो रहा है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि खुलेआम चल रहे इस काले कारोबार पर अंकुश लगाने के बजाए प्रशासनिक अधिकारी अपने एसीदार कमरों में बैठकर मूकदर्शक बने हुए हैं। आखिरकार दिन-रात रेणु नदी में बालू खनन के लिए उतारी गईं प्रतिबंधित मशीनों से संबंधित फोटो व वीडियो शोसल मीडिया पर वायरल होने के बावजूद प्रशासनिक अधिकारी कार्रवाई क्यों नहीं कर रहे हैं, क्या यह सब अधिकारियों की अनदेखी है या फिर उनके संरक्षण में यह काला कारोबार चल रहा है, यह प्रश्न क्षेत्रवासियों के बीच काफी चर्चा का विषय बना हुआ है। लोगों ने जिलाधिकारी का इस ओर ध्यान आकृष्ट कराते हुए पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग किया है। उधर इस बावत जेष्ठ खान अधिकारी से संपर्क कर उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन वे मौजूद नहीं मिले। लिहाजा उनका पक्ष नहीं लिया जा सका।

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