
नई दिल्ली/तिरुवनंतपुरम। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को तिरुवनंतपुरम में आयोजित ‘सैनिक सम्मान सम्मेलन’ को संबोधित करते हुए कहा कि आज का भारत आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर काम कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश अब आतंकवाद के खिलाफ सरहद के इस पार ही नहीं, बल्कि जरूरत पड़ने पर उस पार भी कार्रवाई करने में सक्षम है।
रक्षा मंत्री ने कहा कि उरी अटैक के बाद की सर्जिकल स्ट्राइक, पुलवामा हमला के बाद एयर स्ट्राइक और हाल ही में पहलगाम घटना के बाद चलाए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ जैसे अभियानों ने आतंकवाद के खिलाफ भारत की सख्त नीति को दर्शाया है। उन्होंने दावा किया कि इस ऑपरेशन के दौरान भारतीय सेना ने महज 22 मिनट में दुश्मन को घुटनों पर ला दिया।
राजनाथ सिंह ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि भविष्य में सीमा पार से कोई भी नापाक हरकत होती है, तो भारत न केवल मुंहतोड़ जवाब देगा, बल्कि अभूतपूर्व कार्रवाई भी करेगा।
समुद्री सुरक्षा पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि भारत 2047 तक अपनी नौसेना को दुनिया की सबसे शक्तिशाली सेनाओं में शामिल करना चाहता है। कोचीन शिपयार्ड में बने स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत अब शिपबिल्डिंग में वैश्विक स्तर पर मजबूत स्थिति में है।उन्होंने सैनिकों और पूर्व सैनिकों को देश का मजबूत स्तंभ बताते हुए कहा कि सरकार उनकी भलाई के लिए प्रतिबद्ध है। ‘वन रैंक वन पेंशन’ जैसी योजनाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार ने वर्षों पुरानी मांग को पूरा किया है।
इस दौरान उन्होंने मेजर संदीप उन्नीकृष्णन के बलिदान को याद करते हुए कहा कि देश उनके योगदान को कभी नहीं भूल सकता।













