सीबीएसई 12वीं के बाद अब ‘CUET’ की चुनौती: बोर्ड के अंक नहीं, प्रवेश परीक्षा तय करेगी DU-JNU में दाखिला

नई दिल्ली:सीबीएसई (CBSE) द्वारा 12वीं कक्षा का परिणाम घोषित किए जाने के बाद अब छात्रों और अभिभावकों का पूरा ध्यान देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में दाखिले पर टिक गया है। हालांकि, अब दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) जैसे संस्थानों में प्रवेश के लिए केवल बोर्ड के अंक काफी नहीं होंगे। उच्च शिक्षा में हुए बदलावों के बाद अब CUET (कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट) ही दाखिले का मुख्य आधार बन गया है।
अब बोर्ड अंक ‘टाई-ब्रेकर’, CUET स्कोर ही असली ‘कुंजी’
विशेषज्ञों के अनुसार, वर्तमान व्यवस्था में बोर्ड परीक्षा के अंकों की भूमिका बदल गई है। अब ये अंक अंतिम चयन का आधार न होकर केवल एक पात्रता मानदंड (Eligibility Criteria) रह गए हैं।
टाई-ब्रेकर की भूमिका: यदि दो छात्रों के CUET स्कोर समान होते हैं, तब बोर्ड के अंकों का उपयोग रैंक तय करने के लिए किया जा सकता है।
बदली व्यवस्था: पहले जहाँ DU में 99% की कटऑफ चर्चा में रहती थी, अब छात्रों का पूरा ध्यान प्रवेश परीक्षा पर है। इससे बोर्ड परीक्षा के अंकों का अत्यधिक दबाव कम हुआ है।
प्रमुख विश्वविद्यालयों की प्रवेश प्रक्रिया
दिल्ली विश्वविद्यालय (DU): यहाँ स्नातक पाठ्यक्रमों में प्रवेश पूरी तरह से CUET UG 2026 के स्कोर और CSAS (कॉमन सीट एलोकेशन सिस्टम) के जरिए होगा।
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU): जेएनयू में भी प्रवेश के लिए CUET स्कोर अनिवार्य है। छात्रों को अंग्रेजी और जनरल टेस्ट जैसे विषयों के सही चयन पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी गई है।
अन्य संस्थान: जामिया मिल्लिया इस्लामिया, बीएचयू (BHU) और कई निजी विश्वविद्यालयों ने भी अब इस केंद्रीकृत व्यवस्था को अपना लिया है।
छात्रों के लिए बढ़े अवसर और चुनौतियां
नई शिक्षा नीति के तहत लागू इस व्यवस्था ने उन छात्रों के लिए अवसर बढ़ा दिए हैं, जिनके बोर्ड परीक्षा में औसत अंक थे लेकिन वे प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में बेहतर हैं।
संतुलन बनाना जरूरी: अब छात्रों को बोर्ड और प्रवेश परीक्षा, दोनों की तैयारी के बीच तालमेल बिठाना पड़ रहा है।
संसाधनों की कमी: विशेषज्ञों का मानना है कि जहाँ यह प्रणाली समान अवसर प्रदान करती है, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों के लिए जागरूकता और संसाधनों की कमी अब भी एक बड़ी चुनौती है।
अभिभावकों को सलाह: शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि अब छात्रों को केवल बोर्ड के प्रतिशत पर निर्भर रहने के बजाय प्रवेश परीक्षा (CUET) को समान महत्व देना चाहिए, क्योंकि शीर्ष संस्थानों में प्रवेश की असली चाबी अब वही है।













