अब घर बैठे बनेगा किरायानामा, यूपी में शुरू हुई डिजिटल स्टांपिंग और ई-केवाईसी व्यवस्था

लखनऊ, संवाददाता। उत्तर प्रदेश सरकार ने किरायानामा तैयार कराने की प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और सुविधाजनक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अब राज्य के नागरिकों को 12 महीने तक की अवधि वाले रेंट एग्रीमेंट के लिए स्टांप विक्रेता, दस्तावेज लेखक या सरकारी कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। निबंधन विभाग ने डिजिटल स्टांपिंग और ई-केवाईसी आधारित नई ऑनलाइन व्यवस्था लागू कर दी है, जिसके माध्यम से मकान मालिक और किरायेदार घर बैठे ही कानूनी रूप से वैध किराया अनुबंध तैयार कर सकेंगे।
महानिरीक्षक निबंधन कार्यालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार विभागीय पोर्टल से तैयार और जारी होने वाला डिजिटल रेंट एग्रीमेंट पूरी तरह वैधानिक दस्तावेज माना जाएगा। नई व्यवस्था से समय और धन की बचत होने के साथ-साथ स्टांप शुल्क संबंधी अनियमितताओं पर भी रोक लगेगी।
अब तक बड़ी संख्या में लोग 11 या 12 महीने तक के किराया अनुबंध निजी स्तर पर तैयार कराते थे, जिनमें कई बार निर्धारित स्टांप शुल्क का भुगतान नहीं किया जाता था। ऐसे मामलों में दस्तावेजों की वैधता को लेकर विवाद उत्पन्न होते थे और न्यायालयों तथा सरकारी प्रक्रियाओं में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। नई प्रणाली का उद्देश्य इन समस्याओं का स्थायी समाधान करना है।
निबंधन विभाग के अधिकारियों के अनुसार 12 महीने तक की अवधि तथा 10 लाख रुपये से कम की कुल किराया राशि वाले अनुबंधों के लिए विशेष ऑनलाइन सुविधा विकसित की गई है। इसके तहत नागरिक विभागीय पोर्टल पर जाकर स्वयं किरायानामा तैयार कर सकेंगे।
नई व्यवस्था के अनुसार रेंट एग्रीमेंट के लिए न्यूनतम 500 रुपये का स्टांप शुल्क ऑनलाइन जमा करना होगा। अनुबंध से संबंधित जानकारी दर्ज करते ही सिस्टम स्वतः देय स्टांप शुल्क की गणना करेगा और उसी के अनुसार भुगतान की प्रक्रिया पूरी होगी। इससे स्टांप शुल्क निर्धारण में पारदर्शिता आएगी और भ्रम की स्थिति समाप्त होगी।
ऑनलाइन आवेदन के दौरान मकान मालिक और किरायेदार दोनों का विवरण दर्ज करना अनिवार्य होगा। इसके बाद दोनों पक्षों का ई-केवाईसी सत्यापन किया जाएगा। आधार आधारित प्रमाणीकरण के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि अनुबंध में दर्ज जानकारी सही और प्रमाणित है। इससे फर्जी दस्तावेजों और पहचान संबंधी विवादों की संभावना भी काफी हद तक कम होगी।
विभागीय पोर्टल पर अनुबंध की अवधि, मासिक किराया, सुरक्षा राशि और अन्य आवश्यक जानकारी दर्ज करने के बाद भुगतान ऑनलाइन माध्यम से किया जाएगा। प्रक्रिया पूरी होने पर डिजिटल स्टांपिंग युक्त रेंट एग्रीमेंट तत्काल डाउनलोड और प्रिंट किया जा सकेगा।
नई प्रणाली की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह भी है कि तैयार दस्तावेज विभागीय सर्वर पर सुरक्षित रहेगा। भविष्य में आवश्यकता पड़ने पर मकान मालिक या किरायेदार कभी भी पोर्टल पर लॉगिन कर इसे डाउनलोड कर सकेंगे। इससे दस्तावेज खोने या क्षतिग्रस्त होने की स्थिति में होने वाली परेशानियों से राहत मिलेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल डिजिटल गवर्नेंस को बढ़ावा देने के साथ-साथ किराया व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाएगी। इससे मकान मालिकों और किरायेदारों दोनों को कानूनी सुरक्षा मिलेगी तथा किसी भी विवाद की स्थिति में प्रमाणिक दस्तावेज उपलब्ध रहेंगे।
राज्य सरकार का कहना है कि डिजिटल स्टांपिंग और ई-केवाईसी आधारित यह व्यवस्था नागरिक सेवाओं को सरल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले समय में इससे लाखों लोगों को लाभ मिलेगा और किरायानामा तैयार कराने की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक बनेगी।













