काशी एक्सप्रेस में फर्जी टीटीई पकड़ाया, विजिलेंस टीम ने रंगे हाथ दबोचा

जबलपुर। पश्चिम मध्य रेलवे (पमरे) की विजिलेंस टीम ने ट्रेन में फर्जी टीटीई बनकर यात्रियों से अवैध वसूली करने वाले एक व्यक्ति को रंगे हाथ पकड़ने में सफलता हासिल की है। आरोपी गोरखपुर-लोकमान्य तिलक टर्मिनस काशी एक्सप्रेस (गाड़ी संख्या 15018) में यात्रियों के टिकट जांच रहा था और खुद को रेलवे कर्मचारी बता रहा था।
विजिलेंस टीम ने आरोपी के पास से नकली रेलवे सील, रसीद बुक, फर्जी पहचान पत्र, 3500 रुपये नकद और गन जैसी दिखने वाली एक लाइटर बरामद की है। आरोपी ने गले में फर्जी पहचान पत्र लगाया हुआ था और डबलूसीआरएमएस यूनियन की आईडी का भी इस्तेमाल कर रहा था।
जानकारी के अनुसार रेलवे टिकट चेकिंग स्टाफ को सूचना मिली थी कि एक व्यक्ति टीटीई बनकर ट्रेनों में यात्रियों के टिकट जांच रहा है और उनसे अवैध रूप से पैसे वसूल कर रहा है। सूचना के आधार पर टिकट चेकिंग स्टाफ दीपक कुमार उपाध्याय ने अपने साथियों शिवम सोनी, टीटीई मोहित कुमार और सीसीटीसी दीपक कुमार सोनी के साथ काशी एक्सप्रेस में जांच शुरू की।
जांच के दौरान स्लीपर कोच एस-1 में एक व्यक्ति यात्रियों के टिकट चेक करता मिला। टीम ने पहले उसका वीडियो बनाया और फिर पूछताछ के लिए उसे रोका। पूछताछ में उसने अपना नाम अरुण कुमार यादव (54 वर्ष), निवासी सोहागपुर, जिला नर्मदापुरम बताया।
तलाशी लेने पर उसके पास से सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर के नाम का पहचान पत्र मिला। इसके अलावा जेब से डबलूसीआरएमएस यूनियन का कार्ड भी बरामद हुआ। जांच में पता चला कि वह इन पहचान पत्रों का उपयोग कर यात्रियों पर प्रभाव जमाता था।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार आरोपी के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। विजिलेंस टीम की इस कार्रवाई से ट्रेनों में फर्जी टीटीई बनकर यात्रियों से ठगी करने वालों में हड़कंप मच गया है। रेलवे ने यात्रियों से अपील की है कि टिकट जांच के दौरान संदेह होने पर संबंधित टीटीई का पहचान पत्र अवश्य जांचें और किसी भी अवैध वसूली की सूचना तत्काल रेलवे को दें।













