नए डीईओ के सामने पहली चुनौती: शहर के सरकारी स्कूलों की बदहाली दूर करना
मुख्यालय के स्कूलों में पेयजल, साफ-सफाई, जर्जर भवन और सुरक्षा जैसे बुनियादी इंतजामों का अभाव, अभिभावकों को सुधार की उम्मीद

सिंगरौली। जिले में नए जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) की पदस्थापना के साथ ही सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था में सुधार की उम्मीदें बढ़ गई हैं। खासकर नगर निगम क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले जिला मुख्यालय के कई शासकीय विद्यालय आज भी मूलभूत सुविधाओं के अभाव में संचालित हो रहे हैं। ऐसे में अभिभावकों, जनप्रतिनिधियों और स्थानीय नागरिकों की निगाहें नए डीईओ पर टिकी हैं कि वे इन समस्याओं को प्राथमिकता देते हुए प्रभावी पहल करेंगे।
नगर निगम क्षेत्र के नवजीवन विहार सेक्टर-3 स्थित शासकीय प्राथमिक पाठशाला मटवई की स्थिति लंबे समय से चिंताजनक बनी हुई है। विद्यालय परिसर में साफ-सफाई का अभाव, पेयजल की समुचित व्यवस्था नहीं होना, परिसर में बने गहरे और जानलेवा गड्ढे, जर्जर भवन तथा अन्य आधारभूत सुविधाओं की कमी बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा, दोनों के लिए गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है।
एक ओर शासन “स्कूल चलें हम” अभियान के माध्यम से अधिक से अधिक बच्चों को विद्यालयों से जोड़ने का प्रयास कर रहा है, वहीं दूसरी ओर कई सरकारी स्कूलों की बदहाल तस्वीर इस अभियान के उद्देश्य पर सवाल खड़े करती है। यदि विद्यालयों में स्वच्छ परिसर, सुरक्षित भवन, शुद्ध पेयजल, कार्यशील शौचालय, बिजली, खेल मैदान और बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराया जाए, तो बच्चों की नियमित उपस्थिति बढ़ने के साथ शिक्षा की गुणवत्ता में भी सकारात्मक सुधार देखा जा सकता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा केवल शिक्षकों की उपलब्धता से ही संभव नहीं होती, बल्कि विद्यालयों में बुनियादी सुविधाएं भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं। उनका मानना है कि जिला मुख्यालय के स्कूलों की स्थिति सुधरना पूरे जिले के लिए एक सकारात्मक संदेश होगा।
अब देखना होगा कि नए जिला शिक्षा अधिकारी विद्यालयों की जमीनी हकीकत का निरीक्षण कर समस्याओं के निराकरण के लिए कितनी तेजी से कदम उठाते हैं। यदि प्राथमिकता के आधार पर आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जाते हैं, तो सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले हजारों बच्चों को सुरक्षित, स्वच्छ और बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल सकेगा।













