मणिपुर में सुरक्षा घेरा सख्त: उग्रवादियों के खिलाफ संयुक्त सर्च ऑपरेशन तेज

इंफाल। मणिपुर में शांति और सुरक्षा बहाल करने के उद्देश्य से सुरक्षा बलों ने उग्रवाद विरोधी अभियानों को और अधिक आक्रामक बना दिया है। हाल ही में राष्ट्रीय राजमार्ग-202 पर हुए हमले के बाद, असम राइफल्स ने भारतीय सेना, सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) और मणिपुर पुलिस के साथ मिलकर एक व्यापक संयुक्त सर्च और सैनिटाइजेशन ऑपरेशन चलाया है।
ऑपरेशन का मुख्य केंद्र
यह अभियान विशेष रूप से उखरूल जिले के टीएम कासोम इलाके में संचालित किया गया। सुरक्षा बलों का प्राथमिक लक्ष्य शांगशाक के पास नुंगशांग क्षेत्र में हुए घात लगाकर किए गए हमले (अंबुश) के बाद क्षेत्र को पूरी तरह सुरक्षित बनाना और संदिग्ध गतिविधियों पर अंकुश लगाना है। बलों के बीच बेहतर तालमेल के साथ चलाए गए इस गहन तलाशी अभियान का मकसद उग्रवादी तत्वों के नेटवर्क को ध्वस्त करना है।
सीमा प्रबंधन और मानवीय पहल
सुरक्षा बलों की यह सक्रियता केवल उग्रवाद विरोधी कार्रवाई तक सीमित नहीं है। इससे पहले 30 जून को भी असम राइफल्स ने नागरिक प्रशासन के साथ मिलकर कामजोंग जिले में एक महत्वपूर्ण मानवीय अभियान चलाया था। म्यांमार सीमा से सटे इस क्षेत्र में सुरक्षा बलों ने विस्थापित नागरिकों की पहचान, सत्यापन और बायोमेट्रिक पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी की।
प्रमुख बिंदु:
सक्रिय समन्वय: सेना, बीएसएफ, असम राइफल्स और राज्य पुलिस द्वारा संयुक्त गश्त और निगरानी।
सुरक्षा का दायरा: उखरूल और कामजोंग जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में निरंतर सैनिटाइजेशन।
सीमा प्रबंधन: म्यांमार सीमा पर अवैध गतिविधियों को रोकने के लिए निगरानी और विस्थापितों का व्यवस्थित डेटाबेस तैयार करना।
उद्देश्य: भविष्य में किसी भी राष्ट्रविरोधी गतिविधि को जड़ से खत्म करना और आम जनता को सुरक्षित माहौल प्रदान करना।
रक्षा प्रवक्ता के अनुसार, सुरक्षा एजेंसियां राज्य में पूरी तरह से सतर्क हैं और किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए निरंतर निगरानी बनाए हुए हैं। यह संयुक्त प्रयास ‘विकसित मणिपुर’ की दिशा में सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित करने का एक ठोस कदम है।













