शिक्षा में बारिश न बने बाधा, हिंडालको महान ने 258 विद्यार्थियों को वितरित किए छाते
‘अध्ययन’ परियोजना के तहत बड़ोखर गांव में आयोजित हुआ विशेष कार्यक्रम

बड़ोखर। बारिश के मौसम में विद्यार्थियों की शिक्षा प्रभावित न हो और खराब मौसम के बावजूद वे नियमित रूप से विद्यालय पहुंच सकें, इसी उद्देश्य से हिंडालको महान की सामाजिक उत्तरदायित्व पहल के अंतर्गत संचालित ‘अध्ययन’ परियोजना के तहत बड़ोखर गांव में विद्यार्थियों के बीच छाता वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम के दौरान बड़ोखर स्थित मध्य विद्यालय एवं उच्च विद्यालय के कुल 258 विद्यार्थियों को छाते वितरित किए गए। इस पहल के माध्यम से विद्यार्थियों को बारिश से सुरक्षा प्रदान करने के साथ उनकी नियमित विद्यालय उपस्थिति और शिक्षा की निरंतरता सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया।
कार्यक्रम में वित्त एवं लेखा विभाग के राजेंद्र पावड़े ने कर्मचारी सहभागिता के रूप में भाग लिया। उन्होंने कहा कि “बच्चों की शिक्षा किसी भी परिस्थिति में रुकनी नहीं चाहिए। बारिश के कारण विद्यार्थियों को विद्यालय आने में परेशानी न हो, इसी सोच के साथ यह पहल की गई है। बच्चों की जरूरत को समझकर की गई ऐसी छोटी पहल उनके लिए बड़ी सुविधा बन सकती है और उनकी पढ़ाई को निरंतर बनाए रखने में मदद करती है।”
उन्होंने कहा कि सामाजिक उत्तरदायित्व का वास्तविक उद्देश्य समाज की जरूरतों को समझकर ऐसे कार्य करना है, जिनका सीधा लाभ समुदाय और विशेष रूप से बच्चों के भविष्य को मिले। शिक्षा के क्षेत्र में किया गया प्रत्येक सकारात्मक प्रयास आने वाली पीढ़ी को मजबूत बनाने में योगदान देता है।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में राजीव रंजन, धीरेन्द्र तिवारी एवं शीतल श्रीवास्तव का महत्वपूर्ण योगदान रहा। वहीं, स्थानीय विद्यालयों के शिक्षकों और ग्रामीण स्वयंसेवियों ने भी कार्यक्रम के आयोजन में सक्रिय सहयोग प्रदान किया।
स्थानीय स्तर पर आयोजित इस पहल को विद्यार्थियों और विद्यालय परिवार की ओर से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली। बारिश के मौसम में छाता मिलने से विद्यार्थियों में उत्साह देखने को मिला।
‘अध्ययन’ परियोजना के तहत आयोजित यह पहल शिक्षा को सुगम और निरंतर बनाए रखने की दिशा में हिंडालको महान के सामाजिक उत्तरदायित्व प्रयासों का एक सार्थक उदाहरण है। बारिश की चुनौती के बीच विद्यार्थियों को मिले ये छाते केवल बारिश से बचाव का साधन नहीं, बल्कि उनकी शिक्षा को बिना किसी बाधा के आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता का प्रतीक भी बने।













