शिक्षकों से बोले पीएम मोदी—बच्चों की प्रतिभा पहचानना शिक्षक की सबसे बड़ी जिम्मेदारी

नई दिल्ली। शिक्षक दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार विजेताओं से संवाद किया। इस दौरान उन्होंने शिक्षकों के अनुभव सुने और बच्चों की पढ़ाई के साथ उनके व्यक्तित्व विकास, प्रतिभा पहचानने और बदलती चुनौतियों पर चर्चा की।
संवाद के दौरान एक शिक्षिका ने बताया कि वह बच्चों को नए तरीके से इंटरव्यू लेना सिखाती हैं। इस पर पीएम मोदी ने मजाकिया अंदाज में पूछा कि क्या बच्चे घर जाकर माता-पिता का भी इंटरव्यू लेते हैं? उन्होंने पूछा कि खाना क्यों बनाया, क्या बनाया और कितना बजट लगा जैसे सवाल भी पूछते होंगे। शिक्षिका ने कहा कि उनके स्कूल के बच्चे रिपोर्टर ही बनना चाहते हैं।
एक अन्य शिक्षिका ने बताया कि वह केमिस्ट्री के साथ पर्यावरण शिक्षा और पब्लिक स्पीकिंग की ट्रेनिंग भी देती हैं। पीएम मोदी ने उनसे पूछा कि यदि वे उनके विद्यार्थी हों और अच्छा वक्ता बनना चाहते हों तो क्या करें। शिक्षिका ने आत्मविश्वास को जरूरी बताया। इस दौरान दोनों के बीच हल्का-फुल्का मजाक भी हुआ।
पीएम मोदी ने कहा कि हर बच्चे में कोई न कोई खास प्रतिभा होती है। जरूरी है कि शिक्षक उसे पहचानने का प्रयास करें। उन्होंने शिक्षकों से कहा कि केवल पढ़ाई तक सीमित रहने के बजाय बच्चों की रुचि, क्षमता और चुनौतियों को समझना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने स्क्रीन टाइम और नशे जैसी चुनौतियों पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि बच्चों को खेलकूद और रचनात्मक गतिविधियों से जोड़कर स्क्रीन की लत से दूर किया जा सकता है। शिक्षकों को बच्चों के व्यवहार में होने वाले बदलावों पर भी नजर रखनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि शिक्षा जगत को किताबों और सिलेबस से आगे बढ़कर बच्चों की जिंदगी को समझना होगा। बचपन को बचाए रखने में शिक्षक की सबसे बड़ी भूमिका है।













