आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले देश से बातचीत की गुंजाइश नहीं : राजनाथ सिंह

नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि भारत शांति और संवाद में विश्वास रखता है, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि कोई देश भारत के खिलाफ आतंकवाद को बढ़ावा देता है तो ऐसे देश के साथ बातचीत की गुंजाइश खत्म हो जाती है।
राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत दुनिया के सभी देशों के साथ सम्मानजनक संबंध और सहयोग चाहता है। भारत वैश्विक स्थिरता और साझा समृद्धि के पक्ष में है, लेकिन अपनी रणनीतिक स्वायत्तता छोड़कर नहीं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शंघाई सहयोग संगठन की बैठक में भी स्पष्ट किया है कि आतंकवाद को नीति के साधन के रूप में इस्तेमाल करने वाले और आतंकियों को समर्थन देने वाले देशों को कड़ा संदेश दिया जाना चाहिए।
रक्षा मंत्री ने कहा कि जब तक पड़ोसी देश आतंकवाद को अपनी नीति के रूप में जारी रखेगा, भारत आतंकवाद के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है। उन्होंने कहा कि भारत युद्ध नहीं चाहता, किसी देश की जमीन पर कब्जा करने या किसी देश को धमकाने की नीति में विश्वास नहीं रखता। हालांकि, शांति और कमजोरी के बीच अंतर है और भारत अपनी सुरक्षा से समझौता नहीं करेगा।
उन्होंने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का उल्लेख करते हुए कहा कि आज रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन उद्योगों, विश्वविद्यालयों, नए उद्यमों और वैज्ञानिकों को जोड़ने वाले राष्ट्रीय नवाचार मंच के रूप में भी काम कर रहा है। रक्षा मंत्रालय ने नए उद्यमों और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों से 2400 करोड़ रुपये से अधिक की खरीद को मंजूरी दी है, जबकि नई तकनीक के विकास के लिए 1500 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं।
राजनाथ सिंह ने कहा कि देश के युवा कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मानव रहित विमान, रोबोटिकी, क्वांटम तकनीक, साइबर सुरक्षा और स्वायत्त प्रणालियों जैसे क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु के रक्षा औद्योगिक गलियारों में करीब 70 हजार करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव आने और लगभग 10 हजार करोड़ रुपये का निवेश होने की बात भी उन्होंने कही।
उन्होंने कहा कि भारतीय रक्षा उत्पाद अब 100 से अधिक देशों तक पहुंच रहे हैं। साथ ही सेमीकंडक्टर और महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में आयात पर निर्भरता कम करने के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं।
रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत के विकास का उद्देश्य किसी दूसरे देश को पीछे छोड़ना नहीं, बल्कि सामूहिक और समावेशी विकास को बढ़ावा देना है। उन्होंने आंतरिक सुरक्षा को भी सामूहिक जिम्मेदारी बताते हुए समाज में धर्म, जाति, भाषा और क्षेत्र के आधार पर वैमनस्य से बचने तथा नागरिकों के बीच आपसी विश्वास मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत ग्लोबल साउथ के देशों के हितों को आगे बढ़ाने और जरूरत के समय उनके साथ खड़े रहने के लिए प्रतिबद्ध है।













