बद्रीनाथ धाम की मर्यादा पर सख्ती, धार्मिक स्थलों के पास बिना अनुमति नहीं होंगे कार्यक्रम

चमोली। बद्रीनाथ धाम और चमोली जिले के अन्य धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों के आसपास होने वाले आयोजनों को लेकर जिला प्रशासन ने अनुमति व्यवस्था सख्त कर दी है। अब धार्मिक स्थलों के समीप किसी भी कार्यक्रम के आयोजन से पहले स्थानीय प्रशासन से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा। तेज आवाज वाले ध्वनि उपकरणों के इस्तेमाल और ऐसे आयोजनों पर भी नियंत्रण रहेगा, जिनसे धार्मिक स्थलों की गरिमा प्रभावित होने की शिकायतें सामने आती हैं।
चमोली के जिलाधिकारी गौरव कुमार ने स्पष्ट किया है कि धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व वाले स्थलों के आसपास कार्यक्रम आयोजित करने से पहले संबंधित प्रशासन की अनुमति जरूरी होगी। प्रस्तावित आयोजन की जांच संबंधित उपजिलाधिकारी करेंगे और अनुमति देने का अधिकार भी उन्हीं के स्तर पर रहेगा। नियमों का उल्लंघन होने पर आयोजकों या संबंधित समितियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकेगी।
यह निर्णय 19 और 20 सितंबर को बद्रीनाथ धाम के पास विकसित पर्यटक आगमन प्लाजा में आयोजित देवभूमि सांस्कृतिक महोत्सव 2026 के बाद सामने आया है। कार्यक्रम को लेकर स्थानीय नागरिकों, धार्मिक प्रतिनिधियों और कुछ श्रद्धालुओं ने आपत्तियां जताई थीं। मुख्य आपत्ति धार्मिक स्थल के नजदीक तेज ध्वनि वाले कार्यक्रम और आयोजन के स्वरूप को लेकर थी।
हालांकि, प्रशासन और आयोजन से जुड़े अधिकारियों के अनुसार महोत्सव मंदिर के मुख्य परिसर में नहीं, बल्कि बाहरी पर्यटक आगमन प्लाजा में आयोजित किया गया था। इसे जिला प्रशासन और सेना की ओर से ‘ऑपरेशन सद्भावना’ के तहत आयोजित कार्यक्रम बताया गया। आयोजकों के अनुसार कार्यक्रम का उद्देश्य सीमावर्ती हिमालयी क्षेत्रों के लोगों और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तैनात सैन्यकर्मियों के बीच संपर्क बढ़ाने के साथ सामाजिक-आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करना था। कार्यक्रम की थीम ‘हमारी विरासत, हमारा भविष्य’ रखी गई थी।
धार्मिक प्रतिनिधियों ने भविष्य में बद्रीनाथ क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान के अनुरूप कार्यक्रम आयोजित करने की मांग की है। बद्री धाम धार्मिक पंचायत के अध्यक्ष आशुतोष डिमरी ने भजन संध्या और पारंपरिक धार्मिक प्रस्तुतियों जैसे आयोजनों को प्राथमिकता देने की बात कही। पूर्व बद्रीनाथ धाम धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल ने भी धार्मिक नगरी की विरासत और मर्यादा के अनुरूप कार्यक्रम आयोजित करने की आवश्यकता बताई।
बद्रीनाथ जैसे तीर्थ क्षेत्र में धार्मिक गतिविधियों के साथ पर्यटन भी महत्वपूर्ण है। ऐसे में प्रशासन के सामने धार्मिक वातावरण, स्थानीय भावनाओं, श्रद्धालुओं की सुविधा और पर्यटन गतिविधियों के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती है। नई अनुमति व्यवस्था के तहत आगामी आयोजनों में कार्यक्रम का स्थान, ध्वनि स्तर, स्वरूप और धार्मिक स्थल पर संभावित प्रभाव जैसे पहलुओं की जांच की जाएगी।













