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पीपीपी मॉडल पर मेडिकल कॉलेज देने का फैसला वापस, कांग्रेस ने श्रेय को लेकर उठाए सवाल

 

सिंगरौली। मध्यप्रदेश सरकार द्वारा सिंगरौली समेत प्रदेश के नौ सरकारी मेडिकल कॉलेजों को पीपीपी मॉडल पर निजी हाथों में देने की तैयारी के बाद अब सरकार ने स्पष्ट किया है कि राज्य शासन द्वारा निर्मित तथा राज्य निधि से निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेजों का संचालन सरकार ही करेगी। इन्हें पीपीपी पद्धति पर निजी कंपनियों को नहीं सौंपा जाएगा। सरकार के इस निर्णय के बाद सिंगरौली में राजनीतिक बयानबाजी भी शुरू हो गई है।

शहर कांग्रेस अध्यक्ष प्रवीण सिंह चौहान ने सिंगरौली विधायक राजेंद्र मेश्राम, विधायक रामनिवास शाह और मंत्री राधा सिंह द्वारा सोशल मीडिया पर किए गए पोस्ट को लेकर सवाल उठाए हैं। चौहान ने कहा कि मेडिकल कॉलेज को पीपीपी मॉडल पर दिए जाने के प्रस्ताव के विरोध में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के नेतृत्व में कांग्रेस ने आवाज उठाई थी। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मेडिकल कॉलेज के छात्रों के साथ मिलकर भी विरोध दर्ज कराया था।

चौहान के अनुसार, सिंगरौली के अलावा नीमच, दमोह सहित अन्य जिलों में मेडिकल छात्रों, डॉक्टरों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने धरना-प्रदर्शन किए थे। विरोध के दौरान यह आशंका जताई गई थी कि निजी संचालन से मेडिकल शिक्षा की फीस बढ़ सकती है तथा गरीब मरीजों को मिलने वाली सस्ती स्वास्थ्य सुविधाओं पर असर पड़ सकता है।

उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को कांग्रेस ने लगातार उठाया और मीडिया के माध्यम से भी सरकार का ध्यान आकर्षित किया गया। इसके बाद 24 सितंबर की देर रात सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया कि राज्य शासन द्वारा बनाए गए मेडिकल कॉलेजों का संचालन सरकार ही करेगी और उन्हें पीपीपी मॉडल पर निजी कंपनियों को नहीं दिया जाएगा।

चौहान ने कहा कि सरकार का फैसला वापस होना छात्रों और कांग्रेस के विरोध का परिणाम है। उन्होंने आरोप लगाया कि अब इस निर्णय का श्रेय सिंगरौली के कुछ विधायक और मंत्री अपने सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से लेने का प्रयास कर रहे हैं, जो उचित नहीं है।

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