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माइक्रोसॉफ्ट का एआई जटिल बीमारियों की पहचान में डॉक्टरों से 2 गुना से ज्यादा सटीक, सवाल पूछकर करेगा निदान

304 जटिल मेडिकल मामलों पर हुआ परीक्षण, आपातकालीन विभाग के मामलों में भी बेहतर प्रदर्शन का दावा; वास्तविक मरीजों पर परीक्षण अभी बाकी

नई दिल्ली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) अब बीमारी की पहचान करने के तरीके में बड़ा बदलाव ला सकता है। माइक्रोसॉफ्ट के शोधकर्ताओं ने एमएआई-डीएक्सओ (MAI-DxO) नाम का एक एआई सिस्टम विकसित किया है, जो डॉक्टरों की तरह मरीज से चरणबद्ध तरीके से जानकारी जुटाता है, जरूरी सवाल पूछता है, जांचों का चयन करता है और फिर संभावित बीमारी का निदान करने का प्रयास करता है।

22 अक्टूबर 2026 को प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका साइंस में प्रकाशित शोध के अनुसार, इस सिस्टम ने जटिल मेडिकल मामलों के परीक्षण में सामान्य चिकित्सकों की तुलना में 2 गुना से भी अधिक सटीकता हासिल की। हालांकि, यह परीक्षण नियंत्रित परिस्थितियों में पुराने मेडिकल मामलों पर किया गया था। इसलिए इसके परिणामों को वास्तविक अस्पतालों में हर बीमारी के लिए एआई की श्रेष्ठता का प्रमाण नहीं माना जा सकता।

304 जटिल मामलों में एआई ने हासिल की 83% सटीकता

माइक्रोसॉफ्ट के शोधकर्ताओं ने अपने एआई सिस्टम का परीक्षण न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित 304 जटिल मेडिकल मामलों पर किया। इन मामलों में बीमारी की सही पहचान के लिए लक्षणों, मेडिकल हिस्ट्री और जांच संबंधी जानकारियों का गहराई से विश्लेषण करना जरूरी था।

शोध के अनुसार, एआई सिस्टम ने इन मामलों में लगभग 83% सटीकता हासिल की। इसके मुकाबले संदर्भ पुस्तकों और इंटरनेट की मदद लेने वाले सामान्य चिकित्सकों की सटीकता लगभग 36% रही। बिना बाहरी संदर्भ सामग्री के चिकित्सकों की सटीकता लगभग 22% थी।

इसके अलावा, आपातकालीन विभाग में भर्ती मरीजों के 325 मामलों पर किए गए परीक्षण में एआई सिस्टम ने लगभग 80% सटीकता हासिल की, जबकि सामान्य चिकित्सकों का औसत लगभग 47% रहा।

ये आंकड़े एआई की संभावनाओं को सामने रखते हैं, लेकिन तुलना सामान्य चिकित्सकों से की गई थी। इसमें संबंधित बीमारी के विशेषज्ञों या डॉक्टरों की बहुविषयक टीमों के साथ समान स्तर पर तुलना नहीं हुई थी।

डॉक्टरों की तरह सवाल पूछकर आगे बढ़ेगा सिस्टम

मौजूदा कई मेडिकल एआई मॉडल मरीज के लक्षण, जांच रिपोर्ट और अन्य जानकारियां एक साथ मिलने के बाद संभावित बीमारी का नाम बताते हैं। माइक्रोसॉफ्ट का नया सिस्टम इससे अलग तरीके से काम करता है।यह शुरुआत में उपलब्ध जानकारी का विश्लेषण करता है। इसके बाद तय करता है कि मरीज से कौन-से सवाल पूछने चाहिए और किस तरह की जांच उपयोगी हो सकती है। जांच के परिणाम मिलने पर यह अपनी संभावित बीमारियों की सूची को दोबारा परखता है और आगे के कदम तय करता है।उदाहरण के तौर पर, यदि किसी मरीज को पेट में दर्द है, तो इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं। एआई सिस्टम को दर्द की जगह, अवधि, अन्य लक्षणों और मेडिकल हिस्ट्री से संबंधित जानकारी जुटानी होगी। इसके बाद वह संभावित कारणों का आकलन कर जरूरी जांचों पर विचार कर सकता है।इस प्रक्रिया का उद्देश्य केवल बीमारी का अनुमान लगाना नहीं, बल्कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर निदान तक पहुंचने के विभिन्न चरणों को व्यवस्थित करना है।

ऑर्केस्ट्रेटर संभालता है पूरी प्रक्रिया

इस तकनीक का प्रमुख हिस्सा एमएआई डायग्नोस्टिक ऑर्केस्ट्रेटर है। यह एक समन्वयकारी प्रणाली है, जो कई एआई एजेंटों के बीच काम का बंटवारा करती है और तय करती है कि अगला सवाल या जांच क्या होनी चाहिए।ये एआई एजेंट अलग-अलग चिकित्सकीय विशेषज्ञों की भूमिका का अनुकरण करते हुए संभावित निदान पर विचार करते हैं। इसके बाद समन्वयकारी सिस्टम उनके विश्लेषण को व्यवस्थित करता है और नई जानकारी के आधार पर निष्कर्षों को अपडेट करता है।इसका मतलब यह नहीं है कि वास्तविक डॉक्टरों की टीम मरीज की जांच कर रही होती है। पूरी प्रक्रिया सॉफ्टवेयर आधारित है और इसके निष्कर्षों की विश्वसनीयता का आकलन करना जरूरी है।

कम खर्च में जांच कराने की भी संभावना

शोध में केवल बीमारी की सही पहचान ही नहीं, बल्कि जांचों पर होने वाले अनुमानित खर्च का भी आकलन किया गया। माइक्रोसॉफ्ट के अनुसार, एआई सिस्टम कुछ परिस्थितियों में कम खर्च वाली जांच प्रक्रिया के साथ भी बेहतर सटीकता बनाए रखने में सफल रहा।इससे भविष्य में ऐसी प्रणालियों के जरिए अनावश्यक जांचों पर विचार करने और उपलब्ध संसाधनों का अधिक व्यवस्थित उपयोग करने की संभावना बन सकती है। हालांकि, शोध में इस्तेमाल किए गए खर्च के आंकड़े अमेरिकी स्वास्थ्य व्यवस्था पर आधारित अनुमान थे। इन्हें सीधे भारत के अस्पतालों में होने वाले खर्च के बराबर नहीं माना जा सकता।

क्या एआई डॉक्टरों की जगह ले लेगा?

इस शोध के बाद यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या भविष्य में एआई डॉक्टरों की जगह ले सकता है। फिलहाल, उपलब्ध परिणाम इस निष्कर्ष के लिए पर्याप्त नहीं हैं।

वास्तविक चिकित्सा में डॉक्टर केवल लक्षणों के आधार पर बीमारी का नाम नहीं बताते। उन्हें मरीज की शारीरिक जांच करनी होती है, उसकी व्यक्तिगत परिस्थितियों को समझना होता है और उपचार के लाभ तथा जोखिम का आकलन करना पड़ता है। कई बार मरीज की जानकारी अधूरी होती है या उसकी हालत तेजी से बदलती है।

इसके अलावा, इस शोध में इस्तेमाल किए गए मामले लिखित विवरणों पर आधारित थे। वास्तविक मरीजों की जांच, उपचार के परिणाम और एआई की सलाह से मरीजों को होने वाले लाभ का व्यापक मूल्यांकन अभी आवश्यक है।

माइक्रोसॉफ्ट ने आगे इस तकनीक की वास्तविक चिकित्सा परिस्थितियों में उपयोगिता जांचने की योजना बताई है। इसके तहत अमेरिका के बोस्टन स्थित बेथ इजराइल डेकोनेस मेडिकल सेंटर के साथ सहयोग करके आपातकालीन विभाग में मरीजों की शुरुआती स्थिति का आकलन करने की क्षमता का परीक्षण किया जाना है।

चिकित्सा क्षेत्र में नई संभावनाएं

माइक्रोसॉफ्ट का यह शोध मेडिकल एआई के विकास में एक महत्वपूर्ण दिशा प्रस्तुत करता है। यह दिखाता है कि बीमारी की पहचान में केवल बड़े आंकड़ों का विश्लेषण ही नहीं, बल्कि सही सवाल पूछना, उचित जांच चुनना और नई जानकारी के आधार पर निष्कर्ष बदलना भी महत्वपूर्ण है।

यदि आगे के परीक्षणों में यह तकनीक सुरक्षित और प्रभावी साबित होती है, तो इसका उपयोग डॉक्टरों को जटिल मामलों में संभावित बीमारियों की पहचान करने, जांचों पर विचार करने और चिकित्सकीय निर्णय लेने में सहायता देने के लिए किया जा सकता है।

फिलहाल, इसे डॉक्टरों का विकल्प मानने के बजाय एक संभावित निर्णय-सहायक तकनीक के रूप में देखना उचित होगा। एआई की वास्तविक उपयोगिता का अंतिम आकलन तभी संभव होगा, जब वास्तविक मरीजों पर इसके प्रदर्शन, सुरक्षा और उपचार संबंधी परिणामों का स्वतंत्र मूल्यांकन किया जाएगा।

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